अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के H1B वीजा नीति पर कानूनी संघर्ष तेज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H1B वीजा नियमों को लेकर देशभर के 20 राज्यों ने विरोध में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का आरोप है कि वीजा फीस में वृद्धि करने का निर्णय अवैध है और यह सार्वजनिक सेवाओं जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए खतरा बन सकता है। विशेष रूप से कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि प्रशासन के पास इतनी अधिक फीस लगाने का अधिकार नहीं है।
विरोध के पीछे मुख्य तर्क और कानूनी विवाद
मुकदमे में कहा गया है कि ट्रंप सरकार द्वारा लगाई गई 100,000 डॉलर की H1B वीजा फीस गैरकानूनी है और यह आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालती है। गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने सितंबर 2025 में यह शुल्क लागू किया, जो 21 सितंबर के बाद दायर आवेदनों पर लागू होता है। इस नीति का उद्देश्य अस्पतालों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों जैसे सार्वजनिक संस्थानों को प्रभावित करना है, जो विदेशी श्रमिकों पर निर्भर हैं।
आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का अनुमान
राज्यों का तर्क है कि यह शुल्क अमेरिकी संविधान और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम का उल्लंघन करता है। ऐतिहासिक रूप से, H1B वीजा शुल्क केवल प्रशासनिक लागतों तक सीमित रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई नीति कर्मचारियों की कमी को और बढ़ा सकती है। 2024-2025 में, अमेरिका के कई स्कूल और स्वास्थ्य संस्थान श्रमिकों की कमी का सामना कर रहे हैं, और अनुमान है कि 2036 तक देश में डॉक्टरों की संख्या में भारी गिरावट आएगी।











