पाकिस्तान की असली हकीकत का खुलासा: विदेशी ताकतों का इस्तेमाल
दुश्मन को हराना आसान है, लेकिन उसकी गलतियों को उजागर कराना बहुत कठिन होता है। आज पाकिस्तान के साथ भी ऐसा ही हुआ है। यदि भारत चाहे तो पाकिस्तान को एक झटके में नक्शे से मिटा सकता है, लेकिन उसने कभी ऐसा नहीं किया। इसके बजाय, पाकिस्तान की गुप्त डील्स का सच भारत के सामने नहीं आया। वहीं, तालिबान ने पहली बार पाकिस्तान की पोल खोल दी है।
पाकिस्तान का असली चेहरा: किराए का एयर बेस
इतिहास में पहली बार पाकिस्तान ने लिखित में स्वीकार किया कि उसने अपनी जमीन किसी विदेशी देश को दूसरे देशों पर हमला करने के लिए दे रखी है। यानी अब पाकिस्तान सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक किराए का एयर बेस बन चुका है। तुर्की (Turkey) की राजधानी इस्तांबुल (Istanbul) में तालिबान और पाकिस्तान के बीच बातचीत चल रही थी, जिसका मुख्य उद्देश्य था युद्ध विराम या सीज फायर का समझौता।
तालिबान का दबाव और पाकिस्तान का खुलासा
6 नवंबर को पाकिस्तान किसी भी कीमत पर यह समझौता करना चाहता था क्योंकि तहरीक तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों से पूरा देश आतंकित हो चुका है। पाकिस्तान के बॉर्डर इलाकों में रोज धमाके हो रहे हैं और जनता भी तालिबान के साथ खड़ी नजर आ रही है। इसी माहौल का फायदा उठाकर तालिबान ने पाकिस्तान से वह सच उगलवा लिया, जो भारत कभी नहीं कर पाया।
अफगानिस्तान में ड्रोन हमलों का रहस्य
तालिबान ने पाकिस्तान से पूछा कि हाल ही में अफगानिस्तान में हुए ड्रोन हमले किसने कराए? शुरुआत में पाकिस्तान ने बचने की कोशिश की, लेकिन जब तालिबान ने धमकी दी कि यदि सीज फायर खत्म कर दिया गया तो वह कार्रवाई करेगा, तो पाकिस्तान ने कहा कि यह काम कोई विदेशी देश कर रहा है। जब तालिबान ने पूछा कि कौन सा देश, तो पाकिस्तान ने जवाब दिया कि वह नाम नहीं बता सकता, लेकिन एक गुप्त समझौता हुआ है।
अमेरिकी ड्रोन का इस्तेमाल और पाकिस्तान की स्वीकारोक्ति
पाकिस्तान ने पहली बार स्वीकार किया कि उसके पास अमेरिका (US) के साथ एक ऐसा समझौता है, जिसके तहत अमेरिकी ड्रोन उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह खुलासा तुर्किये (Turkey) में हुई पाकिस्तान-अफगानिस्तान शांति वार्ता के दौरान हुआ। पाकिस्तान ने कहा कि वह इस समझौते को तोड़ नहीं सकता क्योंकि इससे वाशिंगटन (Washington) को अनुमति मिली है। अफगान पक्ष ने पाकिस्तान से लिखित आश्वासन मांगा कि वह अमेरिकी ड्रोन को अपने हवाई क्षेत्र से अफगानिस्तान पर हमला करने की अनुमति नहीं देगा। शुरुआत में पाकिस्तान ने इस पर सहमति दी, लेकिन बाद में इस्लामाबाद से निर्देश मिलने के बाद उसने अपना रुख बदल लिया और कहा कि उसके पास अमेरिकी ड्रोन पर नियंत्रण नहीं है और वह आईएसआईएस (ISIS) के खिलाफ कार्रवाई की गारंटी नहीं दे सकता।
आंतरिक मामलों में पाकिस्तान का झूठ और असली स्थिति
अफगान पक्ष ने साफ कर दिया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का मुद्दा पूरी तरह पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और काबुल अपनी जमीन किसी भी अन्य देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा। इस तरह, तालिबान ने पाकिस्तान की असली हकीकत को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है, जो अब एक किराए के एयर बेस से ज्यादा कुछ नहीं रह गया है।











