भारत-रूस व्यापार संबंधों में नई दिशा और संभावनाएँ
दिल्ली में आयोजित भारत-रूस व्यापार मंच में दोनों देशों के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ इस कार्यक्रम में भाग लेना एक महत्वपूर्ण कदम है। मैं आप सभी का हार्दिक स्वागत करता हूँ और इस मंच में शामिल होकर अपने विचार साझा करने में मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मैं अपने मित्र राष्ट्रपति पुतिन का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। दोनों देशों के बीच अब यूरेशियन आर्थिक संघ (Eurasian Economic Union) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा प्रारंभ हो चुकी है। व्यापार और कूटनीति दोनों में ही विश्वास की नींव सबसे मजबूत आधार होती है, और यही भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत है। यह विश्वास हमारे संयुक्त प्रयासों को नई दिशा और गति प्रदान करता है।
2030 तक व्यापार लक्ष्य से आगे बढ़ने का संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने और राष्ट्रपति पुतिन ने मिलकर 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य तय किया था। लेकिन अब, दोनों नेताओं की बातचीत और वर्तमान संभावनाओं को देखते हुए, ऐसा लगता है कि हमें इस लक्ष्य का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हम इस लक्ष्य को पहले ही हासिल करने के लिए पूरी ताकत से प्रयास कर रहे हैं, और मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। व्यापार में टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने के प्रयास जारी हैं। भारत ने पिछले 11 वर्षों में अभूतपूर्व गति और बदलाव का अनुभव किया है। सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन के आधार पर, भारत तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। जीएसटी में नई पीढ़ी के सुधार और अनुपालन में सुधार के साथ ही, व्यापार को आसान बनाने के कदम भी उठाए गए हैं।
साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए नई पहलें
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में अब निजी क्षेत्र के लिए नए अवसर खोल दिए गए हैं। इससे इन क्षेत्रों में नई संभावनाएँ पैदा हुई हैं। अब हम असैन्य परमाणु क्षेत्र में भी नई पहल शुरू करने जा रहे हैं, जो केवल प्रशासनिक सुधार नहीं बल्कि मानसिकता में बदलाव का संकेत है। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य एक विकसित भारत का निर्माण है। उन्होंने आगे कहा कि लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी हम नई दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। आज की बैठक में, राष्ट्रपति पुतिन और मैंने उत्तरी समुद्री मार्ग (INSTC) यानी चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर पर तेजी से प्रगति करने का निर्णय लिया है। इससे पारगमन का समय कम होगा, लागत घटेगी और नए बाजारों तक पहुंच आसान होगी। डिजिटल तकनीक की मदद से, हम वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर के माध्यम से सीमा शुल्क, लॉजिस्टिक्स और नियामक प्रणालियों को जोड़ सकते हैं, जिससे माल की आवाजाही और भी सहज हो जाएगी।











