भारत ने एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद को बढ़ावा दिया
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद भारत ने रूस (Russia) से एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों की अतिरिक्त बैचों की खरीद के लिए बातचीत शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय के उच्च अधिकारी भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पाँच नई एस-400 मिसाइल प्रणालियों के सौदे को अंतिम रूप देने के लिए रूसी अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। यह कदम भारत-रूस (India-Russia) संबंधों में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दोनों देशों के बीच समझौता जल्द होने की संभावना
दिसंबर में होने वाली भारत-रूस (India-Russia) की वार्षिक शिखर बैठक से पहले ही नई दिल्ली और मॉस्को के बीच इस समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। यह सौदा 2018 में हस्ताक्षरित 5.43 अरब डॉलर के मूल समझौते के बाद का है, जिसमें पाँच में से दो प्रणालियों की डिलीवरी 2026 के अंत तक पूरी होने की योजना है। भारत की 7000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और उत्तरी कमान क्षेत्र की वायु सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इन अतिरिक्त प्रणालियों पर विचार किया जा रहा है।
एस-400 की खरीद और तकनीकी हस्तांतरण
इस नए सौदे के तहत पाँच में से तीन एस-400 मिसाइल प्रणालियाँ सीधे रूस (Russia) से खरीदी जाएंगी, जबकि दो इकाइयाँ भारत में निजी कंपनियों के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के तहत निर्मित की जाएंगी। दोनों पक्षों ने इस सौदे की कीमत को भी अंतिम रूप दे दिया है, जिसमें 2018 के मूल मूल्य में वार्षिक वृद्धि शामिल है। हालांकि, कुछ सूत्रों का कहना है कि भारत द्वारा एस-500 प्रणाली की खरीद की खबरें निराधार हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 की भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान (Pakistan) से आने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों को बेअसर करने में अहम भूमिका निभाई। इसकी उन्नत रडार और बहु-लक्ष्य क्षमताओं ने भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों और शहरों को लंबी दूरी की वायु सुरक्षा प्रदान की। इस प्रणाली ने पाकिस्तान की हवाई धमकियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया, जिससे भारत की वायु सुरक्षा में सुधार हुआ।
रूस-भारत के बीच आगामी यात्रा और रणनीतिक साझेदारी
वर्तमान में, नई दिल्ली और मॉस्को रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तिथियों को अंतिम रूप दे रहे हैं, जो दिसंबर की शुरुआत में होने की संभावना है। यह यात्रा 23वें भारत-रूस (India-Russia) वार्षिक शिखर सम्मेलन का हिस्सा होगी, जो दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा होगी, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने में सहायक साबित होगी।











