पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में मंत्रिमंडल में उथल-पुथल
पाकिस्तान के नियंत्रण वाले जम्मू कश्मीर (POJK) के प्रधानमंत्री चौधरी अनवारुल हक के कैबिनेट के तीन वरिष्ठ मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इन मंत्रियों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान राजनीतिक अस्थिरता और क्षेत्र के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में सरकार असफल रही है। सूचना मंत्री पीर मज़हर सईद पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि वित्त मंत्री अब्दुल मजीद खान, खाद्य मंत्री चौधरी अकबर इब्राहिम और असीम शरीफ ने भी अपने इस्तीफे की घोषणा की है, जैसा कि द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने रिपोर्ट किया है।
मंत्रियों ने क्षेत्रीय अधिकारों को लेकर जताई नाराजगी
मंत्रियों ने अपने इस्तीफे में आरोप लगाया कि हक सरकार ने POJK के निवासियों और पाकिस्तान में रह रहे 25 लाख कश्मीरी शरणार्थियों के संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की अनदेखी की है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की भी मांग की और कहा कि सरकार ने नैतिक और राजनीतिक वैधता खो दी है। इन मंत्रियों ने हाल की अशांति से निपटने के तरीके और शरणार्थी समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर सरकार की उदासीनता पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है।
शरणार्थियों के अधिकारों को लेकर राजनीतिक मतभेद
अब्दुल मजीद खान ने अपने त्यागपत्र में पाकिस्तान में विलय की विचारधारा के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई और कहा कि उनका मकसद कश्मीरी शरणार्थियों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर संयुक्त कार्रवाई समिति (JAAC) की आलोचना की, जिसने POJK विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की मांग की थी। खान ने तर्क दिया कि इस प्रस्ताव में वैधता और आम सहमति का अभाव था, जिससे विस्थापित कश्मीरी समुदाय के अधिकारों पर सवाल उठे हैं।
सरकार की नीतियों और नेतृत्व पर सवाल
इसी तरह, खाद्य मंत्री चौधरी अकबर इब्राहिम ने कहा कि शरणार्थी केवल राजनीतिक संख्या नहीं हैं, बल्कि वे देशभक्त पाकिस्तानी हैं जिन्होंने दशकों तक अलगाव और कष्ट सहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हक सरकार उनकी संवैधानिक स्थिति की रक्षा करने में असमर्थ रही है और कहा कि ऐसे नेतृत्व के तहत सेवा जारी रखना संभव नहीं है। दोनों मंत्री ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की है।











