काबुल में शक्तिशाली विस्फोट और हवाई हमले की खबर
काबुल शहर में हाल ही में दो बड़े धमाके हुए, जिनके बाद स्वचालित गोलियों की आवाजें भी सुनी गईं। खबरों के अनुसार, पाकिस्तान के विमानों ने काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के शिविरों पर हवाई हमला किया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। यह हमला उस समय हुआ जब तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी भारत की यात्रा पर थे। ऐसा माना जा रहा है कि इस यात्रा ने पाकिस्तान को झकझोर कर रख दिया है क्योंकि नई दिल्ली अफगानिस्तान में अपनी प्रभावशाली मौजूदगी बढ़ा रही है।
हवाई हमले का उद्देश्य और तटीय जानकारी
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कई प्रत्यक्षदर्शियों ने शहर के हवाई क्षेत्र में एक लड़ाकू विमान की आवाज़ सुनी। खुफिया सूत्रों का कहना है कि यह हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के प्रमुख नूर वली महसूद पर लक्षित था, जो पूर्वी काबुल में अपने सुरक्षित ठिकाने से गतिविधियों को संचालित कर रहा था। यह घटना तालिबान के पाकिस्तान के साथ संबंधों में आई गिरावट के बीच हुई है, जिसमें पाकिस्तान पर अफगानिस्तान में टीटीपी और तालिबान को समर्थन देने का आरोप है।
विशेष अभियान और परिणाम
काबुल में हुए इस हवाई हमले का मुख्य उद्देश्य टीटीपी के प्रमुख नूर वली महसूद को खत्म करना था, जिन्होंने 2018 में संगठन की कमान संभाली थी। सूत्रों ने पुष्टि की है कि हमले में उनके ठिकाने को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया, लेकिन नूर वली महसूद ने वॉइस मैसेज के माध्यम से कहा है कि वह सुरक्षित हैं और पाकिस्तान में हैं। हालांकि, उनके बेटे की मौत इस हमले में हो गई है। यह घटना एक उच्च-स्तरीय पाकिस्तानी आतंकवादी को निशाना बनाने का संकेत है, जो सीमा पार गुप्त कार्रवाई का संकेत है। यह हमला उस समय हुआ है जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान में आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया था।
पाकिस्तान-तालिबान संबंधों में तनाव और आतंकवाद का प्रभाव
महसूद, जो 9/11 के बाद अमेरिका के साथ पाकिस्तान के गठबंधन को विश्वासघात मानते हैं, पाकिस्तान के लिए एक लगातार सिरदर्द बने हुए हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों पर कई हमले किए हैं, जिनमें सबसे ताजा हमला 8 अक्टूबर को हुआ था। बुधवार को अफगान सीमा के पास टीटीपी द्वारा किए गए एक घातक हमले में दो वरिष्ठ अधिकारियों सहित 11 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इन घटनाओं से पाकिस्तान-तालिबान संबंधों में तनाव और आतंकवाद के खतरे की गंभीरता स्पष्ट होती है।











