वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक बदलावों का प्रभाव
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों के कारण उत्पन्न आर्थिक अस्थिरताओं के संदर्भ में कहा कि विश्वव्यापी व्यापार में टैरिफ की अनिश्चितता अब समाप्त हो चुकी है और अंतरराष्ट्रीय नियमों तथा व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार या उन्हें त्यागने का दौर चल रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने बताया कि भू-राजनीतिक परिदृश्य में व्यापक बदलाव हो रहे हैं, जिनमें वैश्विक विनिर्माण का एक तिहाई हिस्सा चीन में स्थानांतरित हो चुका है और प्रौद्योगिकी हेरफेर के कारण देशों की संप्रभुता में कमी आ रही है। यह चर्चा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन स्कूल में आयोजित अरावली शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय था।
आर्थिक और तकनीकी बदलावों का विश्लेषण
जयशंकर ने कहा कि वर्तमान में वैश्विक परिदृश्य में बदलाव की तीव्रता और उसके प्रभावों पर विचार करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वैश्विक विनिर्माण का एक बड़ा हिस्सा एक ही भूगोल में स्थानांतरित हो चुका है, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका की व्यापार नीतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई देशों में वैश्वीकरण के विरोध में भावनाएँ उभर रही हैं, जिससे टैरिफ में उतार-चढ़ाव हो रहा है और व्यापारिक गणनाएँ उलट-पलट हो रही हैं। साथ ही, ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जहां अमेरिका जीवाश्म ईंधन का प्रमुख निर्यातक बन गया है, वहीं चीन नवीकरणीय ऊर्जा का बड़ा स्रोत बन गया है। डेटा का उपयोग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास पर भी प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दे रहे हैं।
प्रौद्योगिकी, प्रतिबंध और रणनीतिक चुनौतियाँ
जयशंकर ने कहा कि बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां अब महत्वपूर्ण वैश्विक खिलाड़ी बन चुकी हैं। नए कनेक्टिविटी मार्ग उभर रहे हैं, जिनमें से कुछ रणनीतिक उद्देश्यों के लिए हैं। उन्होंने प्रतिबंधों, संपत्तियों की जब्ती और क्रिप्टोकरेंसी के आगमन को वैश्विक वित्तीय परिदृश्य को बदलने वाले कारक बताया। साथ ही, उन्होंने बताया कि दुर्लभ मृदा और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है, और प्रौद्योगिकी नियंत्रण भी सख्त हो रहा है। इस स्थिति में भारत को इन अस्थिरताओं के बीच अपनी रणनीति बनानी होगी और आगे बढ़ते रहना चाहिए, जबकि अधिकांश देश इन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं या अपने हितों की रक्षा में लगे हैं।











