भारतीय मूल की महिला ने अमेरिका की छवि को हिला दिया
एक भारतीय मूल की महिला ने हाल ही में अमेरिकी राजनीति में तहलका मचा दिया है। उसने उस सवाल के माध्यम से अमेरिका की सेक्युलरिज्म और धर्म के प्रति उसकी नीतियों को कठघरे में खड़ा कर दिया, जिसने अमेरिका को बहुत बड़ा झटका दिया है। इस महिला ने अपने सवाल के जरिए न केवल अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस (J.D. Vance) का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि अमेरिका की धर्मनिरपेक्षता की छवि को भी धूल चटा दी।
अमेरिका की सेक्युलरिज्म नीति पर सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस महिला ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति से पूछा कि क्यों उन्हें अपने प्यार का सबूत देने के लिए ईसाई धर्म अपनाना जरूरी है। उसने यह भी पूछा कि क्या उन्हें यह साबित करने के लिए ईसाई बनना पड़ेगा कि वह अमेरिका से कितनी प्रेम करती हैं। महिला ने यह सवाल तब किया जब वांस की पत्नी उषा वांस (Usha Vance) के हिंदू धर्म में होने का जिक्र किया गया। इस सवाल ने अमेरिका की सेक्युलर नीति और धर्म के प्रति उसकी नीतियों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया।
प्रवासियों के प्रति अमेरिका का रवैया और सवाल
महिला ने आगे पूछा कि उन्होंने अमेरिका में अपने जीवन और दौलत का निवेश किया है, फिर भी अब अचानक प्रवासियों को देश से बाहर करने की बात क्यों हो रही है। उसने यह भी पूछा कि क्यों अमेरिका अब अपने ही वादों से पीछे हट रहा है। इस सवाल ने अमेरिका के प्रवास नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला का यह सवाल उस समय आया है जब अमेरिका में प्रवासियों के प्रति नीतियों में बदलाव देखा जा रहा है, और भारतीय मूल के लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
जेडी वांस का विवादित बयान और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने अपनी पत्नी उषा के ईसाई धर्म में आने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उषा कैथोलिक चर्च से प्रभावित होकर हिंदू धर्म छोड़ दें और ईसाई बन जाएं। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई ने इसे पाखंड और धर्म के प्रति असमंजस का प्रतीक बताया है। एक भारतीय-अमेरिकी टिप्पणीकार ने वांस के इस दावे का मजाक उड़ाया, जबकि ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता एरी ड्रेनन ने कहा कि वह पद पर रहते हुए संभवतः पहली बार तलाक लेने वाले उपराष्ट्रपति बनेंगे।
वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सौरभ भारद्वाज ने इस बातचीत की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र का असली रूप है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में एक भारतीय छात्र भी उपराष्ट्रपति से सवाल पूछ सकता है, और उसे जवाब भी मिल सकता है। इस तरह की घटनाएं भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संवाद और बहस को दर्शाती हैं, जो दोनों देशों के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को प्रभावित कर रही हैं।











