भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का फ्रांस का समर्थन
हाल ही में फ्रांस की रक्षा अनुसंधान एजेंसी (FRS) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसने भारत की वायु सेना की ताकत को लेकर नई चर्चा को जन्म दिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के बाल्टो (Balti) लड़ाकू विमान की युद्ध कौशल और क्षमता किसी भी बड़े देश जैसे चीन, तुर्की या पाकिस्तान से कम नहीं है। यह रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि लड़ाकू विमानों की शक्ति केवल उनके तकनीकी जेनरेशन पर निर्भर नहीं होती, बल्कि उनकी युद्धक क्षमता और एयर सिक्योरिटी पर भी निर्भर करती है।
राफेल की विशेषताएं और उसकी विश्वसनीयता
राफेल (Rafale) को 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट माना जाता है, लेकिन फ्रांस की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी कॉम्बैट रिकॉर्ड और एयर सिक्योरिटी इतनी मजबूत है कि यह किसी भी फिफ्थ जेनरेशन जेट को टक्कर दे सकता है। भारत ने अपने राफेल स्क्वाड्रन के माध्यम से इस विमान की क्षमताओं का प्रदर्शन कई बार किया है, जिसमें यह अमेरिकी F2 और F35 जैसे विमानों को भी पीछे छोड़ने में सक्षम रहा है। इस रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि राफेल के खिलाफ चल रहे झूठे प्रचार में चीन, तुर्की, पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका भी शामिल है।
प्रचार और भारत की रक्षा रणनीति
फ्रांस ने अपने अध्ययन में बताया कि राफेल के एक मामूली हादसे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, ताकि इसकी विश्वसनीयता को कम दिखाया जा सके। यह एक सुनियोजित मीडिया अभियान था, जिसका उद्देश्य फ्रांस की रक्षा तकनीक की छवि को धूमिल करना और अमेरिका के F-35 जैसे विमानों को बढ़ावा देना था। भारत ने इस विमान की खरीद के साथ-साथ इसे भारत में ही बनाने की इच्छा भी जताई है। फ्रांस के राजदूत ने कहा है कि उनका उद्योग पूरी तरह से मेक इन इंडिया के मूड में है और वे न केवल राफेल बेचने के इच्छुक हैं, बल्कि भारत में ही इसका निर्माण भी करना चाहते हैं।











