पाकिस्तान पर भारत और अफगानिस्तान का संयुक्त दबाव
पाकिस्तान पर पहली बार ऐसा मौका आया है जब दोनों पड़ोसी देशों भारत और अफगानिस्तान ने एक साथ उसकी सीमाओं को घेर लिया है। दोनों देशों की सेनाओं ने मिलकर तीव्र और व्यापक सैन्य गतिविधियों का संचालन शुरू कर दिया है। दिन हो या रात, दोनों देशों की ओर से गोलीबारी और युद्धाभ्यास की घटनाएं लगातार जारी हैं, जो सामान्य सीमा विवाद से कहीं अधिक गंभीर संकेत हैं। इस स्थिति ने पाकिस्तान में खौफ और अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है।
भूकंप के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और अफगानिस्तान का समर्थन
मज़ारे शरीफ के पास सोमवार को आए 6.3 तीव्रता के भूकंप ने अफगानिस्तान में भारी तबाही मचाई, जिसमें 20 से अधिक लोगों की मौत और 300 से अधिक घायल हो गए। इस प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया, जबकि पाकिस्तान ने अपने ही देश में मौजूद हजारों अफगान शरणार्थियों को जबरदस्ती निकालना शुरू कर दिया। यह कदम पाकिस्तान की अस्थिरता और उसकी नीतियों का स्पष्ट संकेत है। वहीं, अफगानिस्तान के नागरिकों ने भारत के समर्थन को सराहा और कहा कि भारत उनके साथ है, जबकि पाकिस्तान उनके खिलाफ है।
भारत का समर्थन और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी को फोन कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। इस दौरान भारत ने अपने कई हिस्सों में त्रिशूल नामक सैन्य अभ्यास भी शुरू कर दिया है, जिसमें राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर ट्राई मिलिट्री एक्सरसाइज की गई। दूसरी ओर, पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के लोगों का मजाक उड़ाने और उन्हें गद्दार कहने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस सबके बीच अफगानिस्तान की जनता ने भारत का समर्थन करते हुए कहा कि वह अब भारत के साथ ही रहेंगे और भारत का धन्यवाद भी किया। इस स्थिति में पाकिस्तान को दोनों तरफ से घेर लिया गया है, और दोनों देशों ने उसकी सीमाओं पर भारी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है।











