अमेरिकी वीजा नियमों में बदलाव का प्रभाव
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा एच1बी वीजा पर कड़ी नीतियों के लागू होने के बाद, भारतीय आईटी और डिजिटल सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा टेक्नोलॉजीज अपने अमेरिकी भर्ती रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव कर रही है। इस कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अब वह अमेरिका में अधिक स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती पर ध्यान केंद्रित करेगी, ताकि विदेशी प्रतिभाओं पर उसकी निर्भरता कम हो सके। टाटा टेक्नोलॉजीज के सीईओ वारेन हैरिस ने रॉयटर्स को बताया कि जैसे-जैसे वीजा नियमों में बदलाव होंगे, कंपनी अपने अमेरिकी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखेगी।
अमेरिका में स्थानीय भर्ती पर जोर
यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में सबसे बड़ी निजी नियोक्ता कंपनी वॉलमार्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए नए 100,000 डॉलर के आवेदन शुल्क का हवाला देते हुए एच-1बी वीजा धारकों के लिए नई नियुक्तियों को रोक दिया है। यह निर्णय वाशिंगटन द्वारा वीजा शुल्क में वृद्धि और कठोर नियमों की घोषणा के बाद लिया गया है, जो “अमेरिका फ़र्स्ट” नीति का हिस्सा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि विदेशी श्रमिकों को तकनीकी क्षेत्र में अमेरिकी कर्मचारियों की जगह नहीं लेनी चाहिए।
भारतीय वीजा धारकों का बड़ा हिस्सा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में सभी H-1B वीजा धारकों में लगभग 75 प्रतिशत भारतीय हैं। बढ़ती वीजा लागत और नौकरशाही के कारण कई कंपनियों ने H-1B प्रायोजन की आवश्यकताओं को स्थगित कर दिया है। टाटा टेक्नोलॉजीज अब अगले नियुक्ति चक्र से पहले अपने अमेरिकी परिचालन को स्थानीय कर्मचारियों के हाथों में सौंपने की योजना बना रहा है। कंपनी दुनिया भर में लगभग 12,000 लोगों को रोजगार देती है, जिसमें से लगभग 20 प्रतिशत यानी 2024-25 के वित्तीय वर्ष में लगभग 5188 करोड़ रुपये (588 मिलियन डॉलर) का राजस्व उत्तरी अमेरिका से आता है।
भविष्य की रणनीति और बाजार की उम्मीदें
हैरिस ने कहा कि व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद अगले छह से नौ महीनों में अमेरिकी बाजार में सुधार की संभावना है। टाटा पहले ही चीन, स्वीडन और यूके जैसे देशों में स्थानीय स्तर पर नियुक्तियां कर रहा है, और अब अमेरिकी परिचालन को अधिक स्वदेशी कर्मचारियों के हाथों में सौंपना उसकी अगली रणनीति प्रतीत होती है। दूसरी ओर, कॉग्निजेंट जैसी कंपनियों ने नई H-1B नीति के बारे में कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने यह संकेत दिया है कि वे अब केवल उन आवेदकों को ही नौकरी देंगे जो यूएस में कानूनी रूप से काम करने के लिए अधिकृत हैं।











