बाल अधिकारों के संरक्षण में भारत का प्रयास और संयुक्त राष्ट्र का समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान बाल अधिकारों के संरक्षण और विकास पर चर्चा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और लोकसभा सदस्य निशिकांत दुबे ने भारत की पहल का समर्थन किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र का आभार व्यक्त किया, जिसने भारत के तस्करी रोधी प्रयासों और शोषित बच्चों की सुरक्षा के लिए शुरू किए गए कार्यक्रमों को मान्यता दी है। दुबे ने विशेष रूप से बाल हेल्पलाइन 1098 और बच्चों के संरक्षण के लिए चलाए गए अन्य अभियानों का उल्लेख किया, जिनकी संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक ने भी प्रशंसा की है।
पाकिस्तान की भूमिका और सीमा पार आतंकवाद का संदर्भ
दुबे ने पाकिस्तान को बाल अधिकारों के उल्लंघन का मुख्य जिम्मेदार बताया और इसे संयुक्त राष्ट्र के बाल एवं सशस्त्र संघर्ष एजेंडे का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता करार दिया। उन्होंने 2025 की संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान की ओर से बाल शोषण को रोकने के प्रयासों की निंदा की। रिपोर्ट में पाकिस्तान द्वारा स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों पर किए गए हमलों का विस्तृत उल्लेख है, विशेष रूप से लड़कियों के स्कूलों पर हुए हमले और अफगानिस्तान सीमा पर गोलाबारी तथा हवाई हमलों का जिक्र किया गया है, जिनमें कई बच्चे मारे गए हैं।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई और पाकिस्तान से अपेक्षाएं
भाजपा नेता ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का स्मरण किया, जिसमें 26 नागरिक शहीद हुए थे। उन्होंने मई 2025 में भारत की सर्जिकल स्ट्राइक को आतंकवाद के खिलाफ एक संतुलित और विचारशील प्रतिक्रिया बताया। दुबे ने इसे पाकिस्तान द्वारा भारतीय सीमावर्ती गांवों पर किए गए जानबूझकर हमलों से तुलना की, जिनमें नागरिकों और बच्चों को निशाना बनाया गया। उन्होंने पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह अपने आप को आईने में देखे, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उपदेश देना बंद करे और अपनी सीमाओं के भीतर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। साथ ही, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को सीमा पार महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाना बंद करना चाहिए।











