पाकिस्तान का नया ट्रिपल मिलिट्री गठबंधन
पाकिस्तान अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और अजरबैजान के साथ एक मजबूत त्रिपक्षीय सैन्य गठबंधन बनाने जा रहा है। इस गठबंधन का नाम गल्फ कैस्पियन डिफेंस एंड सिक्योरिटी अलायंस रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, इस गठबंधन की औपचारिक घोषणा आगामी महीने में दोहा (Doha) में की जाएगी। पाकिस्तान की सेना प्रमुख आसिम मुनीर इन तीनों देशों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं। यह सैन्य गठबंधन पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते के मॉडल पर आधारित होगा, जिसमें शामिल देश मिलकर सैन्य कार्रवाई करेंगे और किसी भी देश पर हमला होने पर इसे साझा हमला मानकर जवाब दिया जाएगा।
यूएई, कतर और अजरबैजान के साथ सैन्य सहयोग
पाकिस्तान ने इन देशों को सैन्य प्रशिक्षण देने का भी ऐलान किया है। खबर है कि खाड़ी क्षेत्र का एक अन्य देश बहरीन (Bahrain) भी इस गठबंधन में शामिल होने की इच्छा रखता है। सितंबर में हुए सैन्य समझौते के बाद, पाकिस्तान की सेना अपने ढाई हजार जवानों को सऊदी अरब भेज चुकी है। इस कदम का मकसद क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत को मजबूत बनाना है।
सऊदी अरब का पाकिस्तान पर बड़ा खेल
हालांकि, अब खबरें आ रही हैं कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ एक बड़ा खेल खेला है। सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब ने पाकिस्तान के 25,000 सैनिकों को अपने साथ ले लिया है। इन सैनिकों का मुख्य कार्य सऊदी अरब के दुश्मनों, विशेष रूप से इजराइल (Israel), से लड़ना है। इस खुलासे ने सभी को चौंका दिया है, क्योंकि पाकिस्तान का मानना था कि सऊदी अरब की रक्षा डील उसके भारत और अफगानिस्तान से खतरे को रोकने में मदद करेगी।
लेकिन सच्चाई यह है कि इस डील ने पाकिस्तान को सऊदी अरब का समान भागीदार नहीं बल्कि उसका गुलाम बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि भविष्य में भारत या अफगानिस्तान पाकिस्तान पर हमला करता है, तो सऊदी अरब न तो पाकिस्तान का समर्थन करेगा और न ही उसकी रक्षा करेगा। बल्कि, सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इन देशों के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा।
यह भी पता चला है कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव को कम करने के लिए भी प्रयास किए, लेकिन उसने साफ कर दिया कि तालिबान (Taliban) के खिलाफ उसकी कोई भूमिका नहीं है। इस डील का मुख्य उद्देश्य खुद को इजराइल (Israel) से सुरक्षित रखना है। पाकिस्तान के 25,000 सैनिक अब सऊदी अरब के विभिन्न इलाकों में तैनात होंगे और वहां की सुरक्षा में योगदान देंगे।











