बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर ईशनिंदा के आरोपों में बढ़ोतरी
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों से जुड़ी घटनाओं में हाल के वर्षों में तेजी देखी गई है। नई रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 से दिसंबर 2025 के बीच कम से कम 71 ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो देशभर में हिंदू अल्पसंख्यकों पर धार्मिक आधार पर लगाए गए आरोपों का संकेत हैं। यह आंकड़ा उन इलाकों का भी विस्तृत दस्तावेजीकरण करता है, जहां रंगपुर, चांदपुर, चटोग्राम, दिनाजपुर, लालमोनिरहाट, सुनामगंज, खुलना, कोमिला, गाजीपुर, तंगेल और सिलहट जैसे जिलों में इन घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इन मामलों का फैलाव और आरोपों का धार्मिक रूप से प्रेरित होना, अल्पसंख्यकों की संवेदनशीलता और उनके प्रति बढ़ती असहिष्णुता को दर्शाता है।
आरोपों के बाद हिंसक घटनाएं और समुदायों पर प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, ईशनिंदा के आरोप लगने के बाद अक्सर पुलिस कार्रवाई, भीड़ हिंसा और सामूहिक दंड जैसी घटनाएं सामने आई हैं। 19 जून 2025 को, पैगंबर मोहम्मद के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में तमाल बैद्य (22) को अगलझारा, बारीसाल में गिरफ्तार किया गया। तीन दिन बाद, शांतो सूत्रधार (24) को भी इसी तरह के आरोपों के कारण चांदपुर में विरोध प्रदर्शन और हिंसा का सामना करना पड़ा। सबसे हिंसक घटना 27 जुलाई को हुई, जब रंगपुर के बेतगरी यूनियन से रंजन रॉय (17) को गिरफ्तार किया गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद, 22 हिंदू घरों में तोड़फोड़ की गई, जिससे पता चलता है कि आरोप अक्सर व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे समुदाय को निशाना बनाते हैं। कुल मिलाकर, इस अवधि में हुई 71 घटनाओं में पुलिस की गिरफ्तारी, एफआईआर, भीड़ द्वारा मारपीट, हिंदू घरों में तोड़फोड़, शिक्षण संस्थानों से निलंबन और मौतें शामिल हैं। इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक आरोपियों का संबंध हिंदू समुदाय से है, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं।
सोशल मीडिया और साइबर अपराध का बढ़ता प्रभाव
एचआरसीबीएम का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें और साइबर अपराध इन घटनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। कई मामलों में फेसबुक पोस्ट को आधार बनाकर आरोप लगाए गए हैं, जो या तो मनगढ़ंत होते हैं या हैक किए गए खातों से जुड़े होते हैं। कई घटनाओं में बिना फोरेंसिक जांच के ही आरोप लगाकर गिरफ्तारी कर ली गई है। साइबर सुरक्षा कानून के तहत भी शिकायतें दर्ज हुई हैं, खासकर छात्रों के खिलाफ। विश्वविद्यालय और कॉलेज इन घटनाओं का केंद्र बन गए हैं, जहां छात्रों जैसे प्रणय कुंडू (पीयूएसटी), बिकोर्नो दास दिव्या, टोनॉय रॉय (खुलना विश्वविद्यालय) और अपूर्बो पाल (उत्तर-दक्षिण विश्वविद्यालय) को इस्लाम का अपमान करने के आरोप में निलंबित या हिरासत में लिया गया है। इन घटनाओं से देश में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ती चिंता स्पष्ट होती है।











