अफगानिस्तान में भूकंप के बाद भारत की त्वरित मदद
अफगानिस्तान में हाल ही में आए भूकंप ने मानवीय संकट को गहरा कर दिया है, जिसमें सैकड़ों लोग घायल हो गए हैं और कई घर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की भारी कमी के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इस कठिन समय में भारत ने सबसे पहले राहत कार्य में भागीदारी निभाई है, जो उसकी मित्रता और सहयोग की मिसाल है। भारत का विमान काबुल (Kabul) एयरपोर्ट पर उतर चुका है, जिसमें 73 टन जीवन रक्षक दवाइयां, वैक्सीन, और जरूरी मेडिकल उपकरण शामिल हैं। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए खाद्य सामग्री भी भेजी गई है।
भारत की सहायता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
उत्तर अफगानिस्तान में आए 6.3 तीव्रता के भूकंप ने कई ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचाया है, जिनमें मशहूर ब्लू मस्जिद मजार ए शरीफ भी शामिल है। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोगों की मौत हो चुकी है और अनेक घायल हैं। अस्पतालों में दवाओं की कमी के कारण राहत कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। भारत ने तुरंत ही मानवीय सहायता के रूप में मेडिकल सप्लाई, एंटीबायोटिक्स, वैक्सीन, प्रोटीन सप्लीमेंट और इमरजेंसी किट भेजे हैं। 3 नवंबर को भारत ने प्रभावित परिवारों के लिए खाद्य सामग्री भी भेजी, जिससे संकट की घड़ी में राहत पहुंचाई जा सके।
भारत की रणनीति और क्षेत्रीय सहयोग
इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के मंत्री मुत्तकी के बाद अजीजी का भारत दौरा भी इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली की रणनीति फायदेमंद साबित हो रही है। भारत ने न केवल राहत सामग्री भेजी है, बल्कि फौरी मदद के साथ-साथ राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाई है। विदेश मंत्री अजय शंकर ने सीधे फोन कर अफगानिस्तान के विदेश मंत्री से शोक व्यक्त किया और दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत किया। इस मदद के जरिए भारत ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक पड़ोसी नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में सबसे पहले मदद पहुंचाने वाला देश है।











