काशी में देव दीपावली का भव्य आयोजन
वाराणसी में इस वर्ष देव दीपावली के अवसर पर दस लाख दीपकों की रोशनी से शहर जगमगा उठेगा। इस विशेष कार्यक्रम की शुरुआत शंखनाद और डमरू की मधुर ध्वनि से होगी, जो भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा और काशी की पवित्रता का प्रतीक है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अध्यात्मिक परंपरा और धार्मिक आस्था को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करना है।
3-D शो और सांस्कृतिक प्रस्तुति का आकर्षण
कार्यक्रम के दौरान 25 मिनट का ‘काशी-कथा’ नामक 3-D मैपिंग शो दिखाया जाएगा, जिसमें शिव-पार्वती विवाह, विष्णु के चक्र पुष्करिणी कुंड की कथा, बुद्ध के धर्मोपदेश और संत कबीर तुलसीदास की भक्ति परंपरा जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंग जीवंत रूप में प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही आधुनिक काशी की झलक भी दिखाई जाएगी, जिसमें महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की गौरवशाली यात्रा को दर्शाया जाएगा। यह प्रस्तुति दर्शकों को यह संदेश देगी कि हर कोने में भक्ति और हर धड़कन में अध्यात्म बसता है।
शाम को होने वाले विशेष शो और पर्यावरण संरक्षण
देव दीपावली की शाम को वाराणसी का आकाश दीपकों और भक्ति के प्रकाश से जगमगा उठेगा। पर्यटन विभाग के अनुसार, इस रात 8:15, 9:00 और 9:35 बजे तीन बार ‘काशी-कथा’ का 3-D प्रोजेक्शन और लेजर शो दिखाया जाएगा, जो काशी की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करेगा। साथ ही, रात 8:00 बजे गंगा द्वार के सामने 10 मिनट की पर्यावरण अनुकूल ‘ग्रीन आतिशबाजी’ भी होगी, जो बिना प्रदूषण फैलाए आकाश को रंगीन कर देगी। इस तरह का आयोजन पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।
काशी की सांस्कृतिक विरासत का विश्वव्यापी प्रचार
इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य काशी की समृद्ध सांस्कृतिक, अध्यात्मिक और धार्मिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। देव दीपावली न केवल एक त्योहार है, बल्कि यह काशी की ऐतिहासिक परंपरा और अध्यात्मिक प्रकाश का उत्सव है। पर्यटन विभाग का मानना है कि यह कार्यक्रम देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करेगा और उन्हें यह समझाने का अवसर भी प्रदान करेगा कि क्यों काशी को ‘अंतहीन, अमर और अनोखी’ कहा जाता है।











