रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संगठनात्मक दृष्टिकोण
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना सौ साल पहले एक छोटे से कमरे में हुई थी, और आज यह विश्व का सबसे बड़ा संगठन बन चुका है। उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इसकी संरचना, जिम्मेदारियों और एकता पर विशेष बल दिया। सिंह ने कार्यकर्ताओं से संगठन के प्रति सहानुभूति और समर्थन की अपील की, जिससे संगठन की मजबूती और प्रभाव बढ़े।
संगठन की व्यवस्था और जिम्मेदारियों का महत्व
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि हर संगठन की अपनी एक व्यवस्था होती है, जिसमें जिम्मेदारियों को व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर सौंपा जाता है। उन्होंने कहा कि हर सदस्य की जिम्मेदारी अलग होती है और हर कोई अपने आप में विशिष्ट हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि संख्या 111 का अर्थ है कि पहला अंक 100, दूसरा 10 और अंतिम 1 है, लेकिन सभी समान हैं। इस तरह हर सदस्य का महत्व उसकी स्थिति से नहीं, बल्कि संगठन में उसकी भूमिका से तय होता है।
कार्यकर्ताओं के प्रति सहानुभूति और समर्थन का संदेश
रक्षा मंत्री ने वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे कार्यकर्ताओं के प्रति सहानुभूति दिखाएं और कठिन समय में उनका समर्थन करें। उन्होंने कहा कि जीवन में शांति और सुख प्रदान करना भी एक ईश्वरीय कर्तव्य है। सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब भी वे किसी शोकाकुल परिवार या दिवंगत व्यक्ति के बारे में सुनते हैं, तो वे अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। सभी को चाहिए कि वे भी ऐसे समय में उनके साथ खड़े रहें और उनके दुख में सहभागी बनें।











