नोएडा में अंकित चौहान हत्या केस का अंत: 10 वर्षों बाद न्याय
नोएडा के प्रसिद्ध अंकित चौहान हत्याकांड को आखिरकार दस वर्षों की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद न्याय मिल गया है। सोमवार को नई दिल्ली स्थित सीबीआई (Central Bureau of Investigation) की विशेष अदालत ने इस जघन्य मामले में दो मुख्य आरोपियों शशांक जादौन और मनोज कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने दोनों पर जुर्माने के रूप में शशांक पर 70 हजार रुपये और मनोज पर 50 हजार रुपये का भुगतान भी आदेशित किया।
मामले का संक्षिप्त इतिहास और जांच प्रक्रिया
यह मामला 13 अप्रैल 2015 का है, जब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकित चौहान को नोएडा सेक्टर-76 में उनकी फॉर्च्यूनर कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच में हत्यारों की पहचान नहीं हो सकी थी। बाद में पीड़ित परिवार की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस जघन्य अपराध की जांच का जिम्मा सीबीआई (CBI) को सौंप दिया।
सीबीआई ने 14 जून 2016 को इस केस में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। 2017 में आरोपियों शशांक जादौन और मनोज कुमार को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी ने हत्या, लूट की कोशिश, साजिश और सबूत मिटाने के आरोपों में 29 अगस्त 2017 को चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में इस केस का ट्रायल गाजियाबाद से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया। लंबी सुनवाई के बाद 20 सितंबर 2025 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया और 13 अक्टूबर 2025 को उन्हें सजा सुनाई गई।
न्याय का अंतिम फैसला और पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद मृतक के परिवार ने कहा कि न्याय में देरी जरूर हुई, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा था कि सच आखिरकार सामने आएगा। इस केस का अंत न केवल कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, बल्कि यह अपराध के खिलाफ मजबूत संदेश भी देता है।











