अयोध्या में दीपोत्सव का विशेष आयोजन और पर्यटन पहल
अयोध्या में होने वाले विश्वप्रसिद्ध दीपोत्सव के दौरान उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड ने देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए खास ईको टूरिज्म यात्रा योजनाओं की शुरुआत की है। इस योजना के तहत, पर्यटकों को अयोध्या के साथ ही लखनऊ, उन्नाव, वाराणसी, गाजीपुर और चंदौली जैसे प्रमुख सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण कराने का लक्ष्य है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ राज्य की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कराना और स्थानीय समुदायों की आय में वृद्धि करना है।
विभिन्न आइटिनरी के माध्यम से पर्यटकों का अनुभव बढ़ाना
उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड ने पर्यटकों के लिए कई आकर्षक यात्रा योजनाएं तैयार की हैं। पहली योजना दो दिन और एक रात की है, जिसमें पहले दिन अयोध्या का दर्शन और दूसरे दिन गोंडा स्थित पार्वती अर्गा बर्ड सेंचुरी का दौरा शामिल है। दूसरी योजना तीन दिन और दो रात की है, जिसमें लखनऊ का भ्रमण, अयोध्या का दर्शन और कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट का अनुभव शामिल है। वहीं, तीसरी योजना चार दिन और तीन रात की है, जिसमें रामसर साइट नवाबगंज पक्षी विहार के साथ उन्नाव को भी शामिल किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य पर्यटकों को धार्मिक स्थलों के साथ ही प्राकृतिक स्थलों का भी आनंद लेने का अवसर प्रदान करना है।
प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों का समागम
अयोध्या-वाराणसी-गाजीपुर-चंदौली की यात्रा योजना में अयोध्या, वाराणसी और गाजीपुर के प्रमुख स्थलों के साथ ही सारनाथ स्थित कछुआ प्रजनन एवं पुनर्वास केंद्र, गंगा दर्पण म्यूजियम और गाजीपुर के सैदपुर क्षेत्र में गंगा नदी में डॉल्फिन देखने का अवसर भी शामिल है। पांचवीं योजना पांच दिन और चार रात की है, जिसमें चंदौली जिले के राजदरी और देवदरी जलप्रपात का भ्रमण भी शामिल है। इन सभी योजनाओं में उन स्थलों को प्राथमिकता दी गई है, जो पर्यटकों के लिए आसानी से पहुंच योग्य हैं। इन आइटिनरी की जानकारी और विवरण बोर्ड की वेबसाइट www.upecoboard.up.gov.in और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।
प्राकृतिक संसाधनों का आनंद और पर्यटन का विकास
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश धार्मिक, आध्यात्मिक और ईको टूरिज्म का संगम है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि दीपोत्सव के दौरान आने वाले श्रद्धालु न केवल धार्मिक स्थलों का दर्शन करेंगे, बल्कि राज्य की प्राकृतिक धरोहरों जैसे जंगल, जलप्रपात, पक्षी विहार और नदी पर्यावरण का भी आनंद ले सकेंगे। यह कदम उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को विश्व स्तर पर पहचान दिलाएगा।











