दोहा में भारत की शतरंज सफलता का जश्न
2025 के फिडे वर्ल्ड रैपिड और विमेंस वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप का आयोजन दोहा (Doha) में हुआ, जहां भारत ने अपनी मजबूत उपस्थिति का प्रदर्शन किया। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारतीय ग्रैंडमास्टर्स अर्जुन एरिगैसी (Arjun Erigaisi) और कोनेरू हम्पी (Koneru Humpy) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्रमशः पुरुष और महिला वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किए। इस प्रतियोगिता में पुरुष वर्ग का खिताब नॉर्वे (Norway) के दिग्गज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन (Magnus Carlsen) ने जीता, जबकि महिला वर्ग में रूस (Russia) की खिलाड़ी अलेक्ज़ेंड्रा गोर्याचकिना (Alexandra Goryachkina) ने पहला स्थान हासिल किया।
भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन और प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अर्जुन और हम्पी दोनों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अलग-अलग संदेशों में अर्जुन के जज़्बे और हम्पी की मेहनत की प्रशंसा की, साथ ही उनके उज्जवल भविष्य की कामना भी की। अर्जुन ने पुरुष वर्ग में 13 राउंड में 9.5 अंक प्राप्त कर अपने करियर का पहला वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप पदक जीता। वह मैग्नस कार्लसन से केवल एक अंक पीछे रहे, जिन्होंने 10.5 अंकों के साथ छठा वर्ल्ड रैपिड खिताब अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ अर्जुन, विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) के बाद वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप के पोडियम पर पहुंचने वाले दूसरे भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। वहीं, महिला वर्ग में कोनेरू हम्पी भी बेहतरीन फॉर्म में नजर आईं। अंतिम राउंड से पहले वह चीन (China) की झू जीनर (Zhu Jiner) और गोर्याचकिना के साथ संयुक्त रूप से शीर्ष पर थीं। तीनों ने टूर्नामेंट को 8.5 अंकों के साथ समाप्त किया, लेकिन टाई-ब्रेक के आधार पर हम्पी को तीसरा स्थान मिला। आखिरी मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी बी. सविता (B. Saviata) के खिलाफ ड्रॉ के कारण हम्पी को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। यह पदक हम्पी के करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिन्होंने इससे पहले 2019 और 2024 में भी वर्ल्ड रैपिड चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता है।
भारत की शतरंज में बढ़ती ताकत और भविष्य की उम्मीदें
दोहा में अर्जुन और हम्पी की इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत तेजी से विश्व शतरंज के मंच पर एक मजबूत शक्ति बन रहा है। इन खिलाड़ियों की मेहनत और प्रतिभा ने देश का नाम विश्व स्तर पर ऊंचा किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत से और भी कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी विश्व शतरंज के शिखर पर पहुंच सकते हैं, जिससे देश का खेल और भी मजबूत होगा।











