भगवान की इच्छाएं पूरी करने का सही तरीका
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, हर व्यक्ति जब भगवान की पूजा करता है, तो उसकी मनोकामना पूरी होने की आशा रखता है। परंतु, अक्सर ऐसा देखा जाता है कि हमारी कई इच्छाएं पूरी नहीं होतीं और हम निराश हो जाते हैं। इस स्थिति में मन में नकारात्मक विचार उत्पन्न होने लगते हैं और सवाल उठते हैं कि आखिर भगवान हमारी प्रार्थनाओं को क्यों नहीं सुनते।
महाराज बताते हैं कि भगवान हमारी इच्छाएं तभी पूरी करते हैं जब हम उनसे सच्चे मन से जुड़ें और उन्हें अपना मानें। यदि हमने कभी भी बिना स्वार्थ के, पूरी श्रद्धा और सच्चाई के साथ पूजा-पाठ, व्रत, तपस्या या मंत्र जप किया है, तभी भगवान हमारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
भगवान की इच्छाएं पूरी करने की दो मुख्य स्थितियां
प्रेमानंद जी महाराज का मानना है कि भगवान भक्त की इच्छाएं दो परिस्थितियों में पूरी करते हैं। पहली स्थिति है अपनापन की। इसको समझाने के लिए वे एक उदाहरण देते हैं-मान लीजिए कि यह संसार एक दुकान है और भगवान उसके मालिक हैं। जब कोई सामान्य ग्राहक दुकान पर आता है, तो दुकानदार उससे कीमत वसूलता है। लेकिन जब घर का कोई सदस्य अपने घर से आता है और कुछ मांगता है, तो उसे बिना कीमत चुकाए ही वस्तु मिल जाती है, क्योंकि वह घर का सदस्य है।
इसी तरह, भगवान भी तभी इच्छाएं पूरी करते हैं जब भक्त उनसे अपना अपनापन बना ले। इसलिए, भगवान को अपना मित्र बनाएं, या फिर तपस्या, पूजा, व्रत और अनुष्ठान के माध्यम से उन्हें अपना बनाएं। जब ऐसा होता है, तभी भगवान आपकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
भगवान से यह कहना उचित नहीं
महाराज कहते हैं कि भगवान के पास सब कुछ मौजूद है। उनसे यह कहना कि “मुझे यह दे दो, मैं लड्डू चढ़ाऊंगा या दीया जलाऊंगा” सही नहीं है। यह बात किसी दास से कहने जैसी है, न कि भगवान से। भगवान ने इस संसार की रचना की है और उनके पास हर वस्तु पहले से ही मौजूद है। इसलिए, हमें चाहिए कि हम अपने हृदय में श्रद्धा और सच्चाई के साथ उनसे जुड़ें और अपने कर्मों से उन्हें प्रसन्न करें।











