तुलसी विवाह पूजा सामग्री और उसकी महत्ता
हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष धार्मिक महत्व है, जो कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी के दिन मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु (Vishnu) के शालिग्राम स्वरूप और माता तुलसी का दिव्य विवाह संपन्न किया जाता है। इस पर्व का आयोजन घर-घर में श्रद्धा और उल्लास के साथ किया जाता है, और माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
पूजा स्थल और आवश्यक सामग्री
तुलसी विवाह की शुरुआत पूजा स्थल की तैयारी से होती है, जो स्वच्छ, पवित्र और आकर्षक होना चाहिए। मुख्य रूप से तुलसी का पौधा, जिसे गमले या भूमि में स्थापित किया जाता है, पूजा का केंद्र होता है। इसके अलावा, एक सुंदर मंडप, जिसमें बांस, लकड़ी या सजावटी कपड़े का उपयोग किया जाता है, बनाया जाता है। तुलसी और शालिग्राम जी के लिए छोटे-छोटे आसन, पवित्रता का प्रतीक कलश, और पूजा के दौरान उपयोग होने वाली सामग्री जैसे पान, सुपारी, लौंग, इलायची, रोली, अक्षत, दीपक, घी, अगरबत्ती, फूल, नारियल, गंगाजल, मिष्ठान और फल शामिल हैं।
सजावट और पूजा में उपयोग होने वाली वस्तुएं
तुलसी माता का श्रृंगार लाल या पीली चुनरी, बिंदी, कंगन, सिंदूर और मेहंदी से किया जाता है। शालिग्राम जी को पीले कपड़ों और फूलों से सजाया जाता है। विवाह के समय तुलसी और शालिग्राम को फूलों की माला पहनाई जाती है, और सिंदूर व हल्दी का प्रयोग शुभता और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में किया जाता है। इसके अतिरिक्त, छोटे नकली आभूषण और सजावटी वस्तुएं भी तुलसी माता को दुल्हन की तरह सजाने के लिए उपयोग में लाई जाती हैं। पूजा सामग्री में दीपक, घी, फूल, नारियल, गंगाजल, मिष्ठान, फल और दक्षिणा शामिल हैं, जो इस पावन समारोह को सफल बनाने में मदद करते हैं।










