स्कंद षष्ठी 2025 का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व
स्कंद षष्ठी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक त्योहार है, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद, मुरुगन या सुवर्णकुमार) को समर्पित है। यह पर्व हर वर्ष शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों-तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक-में बड़े ही उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जाता है। इस दिन का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह धर्म की जीत का प्रतीक है, जब भगवान स्कंद ने असुर तारकासुर का वध कर देवताओं को मुक्ति दिलाई थी।
2025 में चंपा षष्ठी का विशेष संयोग और परंपराएँ
साल 2025 में चंपा षष्ठी 26 नवंबर बुधवार को मनाई जाएगी। यह तिथि भगवान कार्तिकेय और महाराष्ट्र में अत्यंत लोकप्रिय स्वरूप भगवान खंडोबा को समर्पित है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के अनेक गांवों और शहरों में भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष महापूजा का आयोजन होता है, और हल्दी और फूल चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। कई स्थानों पर ध्वज-पूजन, ढोल-ताशों के साथ विशाल जुलूस भी निकाले जाते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण और धार्मिक मान्यताएँ
वैदिक ज्योतिष में स्कंद षष्ठी का संबंध मंगल ग्रह से माना गया है, जो साहस, पराक्रम, जोश और आत्मबल का प्रतीक है। इस दिन की पूजा, मंत्र जप और व्रत से मंगल दोष में कमी आती है, और व्यक्ति को आत्मविश्वास, ऊर्जा तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता मिलती है। मान्यता है कि भगवान स्कंद की पूजा से व्यक्ति के अंदर छिपी शक्ति जागृत होती है और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का साहस बढ़ता है।











