2026 में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव मुख्य राशियों पर
वर्ष 2026 में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव तीन प्रमुख राशियों पर बना रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ने 29 मार्च 2025 को मीन राशि (Pisces) में गोचर किया था और यह स्थिति 2028 तक बनी रहेगी। मेष (Aries) राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो चुका है, जो इस वर्ष भी जारी रहेगा। वहीं, मीन राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है, जो 2026 में भी प्रभावी रहेगा। इस चरण को सबसे अधिक कष्टकारी माना जाता है। कुंभ (Aquarius) राशि पर साढ़ेसाती का तीसरा और अंतिम चरण चल रहा है, जो इस वर्ष भी बना रहेगा। यह तीसरा चरण समाप्ति की ओर है, लेकिन हर व्यक्ति पर इसका असर अलग-अलग होता है, यह उसकी जन्म कुंडली, नक्षत्र और व्यक्तिगत ग्रह स्थिति पर निर्भर करता है।
मेष, मीन और कुंभ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव
मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण तब शुरू होता है जब शनि जन्म राशि से बारहवें भाव में प्रवेश करता है। इस समय मेष राशि के जातकों को आंतरिक बदलाव और जीवन में नई तैयारियों का सामना करना पड़ता है। 2026 में इन लोगों को चिंता, बेचैनी और मनोबल में उतार-चढ़ाव का अनुभव हो सकता है। कामकाज में मन नहीं लगेगा, पुराने कर्ज और जिम्मेदारियां सामने आएंगी, जिससे खर्च में वृद्धि हो सकती है। परिवार से दूरी या मतभेद भी संभव हैं, और जीवनसाथी या करीबी रिश्तेदारों के साथ गलतफहमी के कारण तनाव बढ़ सकता है।
वहीं, मीन राशि के जातकों के लिए साल 2026 सबसे अधिक कठिनाई लेकर आएगा। इस वर्ष वे शनि की साढ़ेसाती के दूसरे चरण से गुजर रहे हैं, जिसे ज्योतिष शास्त्र में सबसे कष्टकारी माना गया है। इस दौरान जीवन में बदलाव, स्थिरता और जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ेगा। स्वास्थ्य, पहचान और जिम्मेदारियों पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा। प्रेम, संवाद और समझदारी से आप अपने रिश्तों को मजबूत बना सकते हैं।
कुंभ राशि के जातकों के लिए 2026 का वर्ष बेहतर संकेत दे रहा है। कार्यस्थल पर स्थिरता आएगी, मेहनत का फल मिलेगा और आय में सुधार होगा। पुराने कर्ज चुकाने के संकेत हैं। परिवार में जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, और माता-पिता या बुजुर्गों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक होगा। वाणी में कठोरता से रिश्तों में तनाव आ सकता है, लेकिन आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता मजबूत होगी। इस वर्ष दांत, गला, पेट या हड्डियों से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
शनि साढ़ेसाती से राहत पाने के आसान उपाय
शनि देव की नियमित पूजा और व्रत से इस प्रभाव को कम किया जा सकता है। शनिवार को शनि मंदिर जाकर दर्शन करें और सरसों का तेल, काले तिल अर्पित करें। हनुमान चालीसा, शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करें। प्रतिदिन या शनिवार को 108 बार जप करने से भी लाभ होता है। मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें।
विशेष उपाय के रूप में, पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों का तेल जलाएं, काले कुत्ते, कौवे या चींटियों को भोजन कराएं। लोहे, काले तिल, उड़द दाल और काले वस्त्र का दान भी शुभ माना जाता है। इन उपायों से शनि की ढैय्या का प्रभाव कम किया जा सकता है।









