पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व और तिथि
सनातन धर्म में पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत अत्यंत पुण्यप्रद, फलदायी और कल्याणकारी माना जाता है। वर्ष 2025 में यह पावन तिथि 30 दिसंबर को मंगलवार के दिन पड़ रही है, जो साल का अंतिम दिन है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस दिन की एकादशी तिथि का शुभारंभ सुबह 07 बजकर 50 मिनट से हो रहा है, इसलिए गृहस्थ परंपरा के अनुसार इसी दिन व्रत का पालन शास्त्रसम्मत माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, जो पालनहार, करुणामय और मोक्षदायक माने गए हैं। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ वाणी अग्रवाल से पौष पुत्रदा एकादशी व्रत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
एकादशी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्त्व
पौराणिक ग्रंथों जैसे पद्मपुराण, स्कंदपुराण, विष्णु पुराण और नारद पुराण में एकादशी व्रत की महिमा का विस्तार से उल्लेख किया गया है। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि एकादशी व्रत से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं, मन निर्मल होता है और अंततः विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। वेदों में उपवास, संयम और आत्मशुद्धि को मानव जीवन का आधार माना गया है। पौष मास का समय शीतकालीन, तप और साधना का काल है, इसलिए इस मास की एकादशी का पुण्यफल और भी अधिक होता है। यह व्रत इंद्रियों पर नियंत्रण और मानसिक संतुलन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
पौष पुत्रदा एकादशी का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पौष पुत्रदा एकादशी का सीधा संबंध संतान सुख, गुरु ग्रह की कृपा और पारिवारिक स्थिरता से माना गया है। गुरु ग्रह को संतान, ज्ञान और धर्म का कारक ग्रह कहा जाता है। इस दिन श्रद्धा से विष्णु पूजा करने से संतान संबंधी बाधाएं, गुरु दोष, पारिवारिक तनाव और मानसिक अशांति दूर होती है। साथ ही यह व्रत भाग्य को मजबूत करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।











