मकर संक्रांति 2026 का विशेष संयोग और धार्मिक महत्व
2026 में मकर संक्रांति का त्योहार एक अद्भुत और ऐतिहासिक संयोग लेकर आ रहा है, जब 23 वर्षों के बाद एकादशी व्रत का विशेष अवसर बन रहा है। इस वर्ष 14 जनवरी को बुधवार के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करेंगे, जिससे सनातन धर्मावलंबियों के लिए शुभ कार्यों की शुरुआत का संकेत मिलेगा। इस दिन पूरे दिन पुण्यकाल रहेगा, जिसमें स्नान, दान, धार्मिक अनुष्ठान और मंत्र जाप का विशेष महत्व होगा। मकर संक्रांति के इस शुभ अवसर पर सूर्य अपनी मकर राशि में प्रवेश कर सभी शुभ कार्यों का मार्ग प्रशस्त करेंगे। इस साल शादी-विवाह के लिए कुल 50 शुभ मुहूर्त भी उपलब्ध हैं, जो इस पर्व को और भी खास बना रहे हैं।
मकर संक्रांति का त्योहार और ज्योतिषीय संयोग
ज्योतिषाचार्य एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु (Chandrashekhar Sahastrabahu) के अनुसार, माघ कृष्ण एकादशी 14 जनवरी को 23 वर्षों के बाद मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का महासंयोग बन रहा है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र के साथ-साथ सर्वार्थ अमृत और सिद्धि योग का भी शुभ संयोग रहेगा। इस दिन गंगा स्नान, सूर्य को जल अर्पित करना, आदित्यहृदय स्त्रोत्र का पाठ, विष्णु पूजा, सत्यनारायण व पुरुषसूक्त का पाठ, वेद मंत्रों का जाप और विशेष द्रव्यों का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाएगा। इन धार्मिक क्रियाओं से न केवल शुभता बढ़ेगी, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आएगी।
मकर संक्रांति का विशेष वाहन और धार्मिक उपाय
मकर संक्रांति के दिन मुख्य वाहन बाघ होगा, जो इस पर्व की महत्ता को दर्शाता है। इसके साथ ही उपवाहन अश्व है, जो समाज में सुख, समृद्धि और कुछ उथल-पुथल का संकेत देता है। बाघ वाहन होने से इस वर्ष सोना, चांदी, दूध और दलहन जैसी वस्तुओं के दाम बढ़ने की संभावना है, लेकिन यह समय प्रजा के लिए लाभकारी भी साबित होगा। संक्रांति के बाद आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता में वृद्धि होगी। इस पर्व पर सूर्य-शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए तिल, खिचड़ी, उन्नी वस्त्र, शुद्ध घी और मेवा मिष्ठान का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही, काला तिल, लोहा, कंबल, उड़द दाल जैसे वस्तुओं का दान भी शांति और समृद्धि के लिए किया जाता है। सूर्य और शनि के मंत्रों का जाप, पीपल और शमी वृक्ष की पूजा और तिल से संबंधित उपाय भी इस दिन लाभकारी होते हैं।











