मकर संक्रांति 2026 का महत्व और परंपराएँ
मकर संक्रांति का त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है, जिसमें दही-चूड़ा खाने की परंपरा धार्मिक, मौसमी और वैज्ञानिक कारणों से जुड़ी हुई है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल जैसे क्षेत्रों में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसे शुभ और पुण्यकाल माना जाता है। इस अवसर पर सादा, सात्विक और शीतल भोजन करने का रिवाज है।
मकर संक्रांति कब और क्यों मनाई जाती है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति उस दिन मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे सूर्य का राशि परिवर्तन या मकर संक्रांति कहा जाता है। इस वर्ष यह त्योहार 14 जनवरी 2026 को बुधवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, गंगा, यमुना, सरस्वती या अन्य पवित्र जल से स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सूर्य का उत्तरायण और दही-चूड़ा का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जो शुभ और पुण्यकाल माना जाता है। इस दिन सादा और शीतल भोजन जैसे दही-चूड़ा का सेवन किया जाता है, जो बिना पकाए तैयार होता है। ज्योतिषाचार्य एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु के अनुसार, दही-चूड़ा देवताओं को प्रिय है और इसे खाने से पुण्य फल प्राप्त होते हैं, साथ ही सूर्य दोष से मुक्ति भी मिलती है। यह पर्व शरीर को ऊर्जा देने और ठंड से सुरक्षा प्रदान करने वाले भोजन का प्रतीक है।









