मकर संक्रांति 2026 का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति का त्योहार भारतीय परंपरा में केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता, परंपरा और लोक आस्था का प्रतीक भी है। सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश के साथ ही यह पर्व नई ऊर्जा, सकारात्मकता और जीवन में प्रगति का संदेश फैलाता है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन मुख्य रूप से तिल, गुड़ और खिचड़ी इस त्योहार की पहचान हैं।
पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान का विशेष महत्व
शास्त्रों में मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान को अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और खिचड़ी का दान किया जाता है। मान्यता है कि तिल का दान शनि दोष को शांत करता है, जबकि सूर्य को अर्घ्य देने से स्वास्थ्य और यश की प्राप्ति होती है। इसी कारण संगम, गंगा (Ganga) और अन्य तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
खिचड़ी का प्रतीकात्मक महत्व और सामाजिक परंपराएँ
मकर संक्रांति को कई क्षेत्रों में खिचड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। खिचड़ी अन्न, दाल और घी का संतुलित मिश्रण है, जो समृद्धि, संतोष और सामाजिक समानता का प्रतीक माना जाता है। इसे भगवान को भोग के रूप में अर्पित करने के बाद गरीबों और जरूरतमंदों में बांटना विशेष पुण्यकारी माना जाता है। यह परंपरा समाज में सेवा और करुणा का भाव जागृत करती है।










