करवा चौथ व्रत पारण का सही समय और महत्व
करवा चौथ का त्योहार विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करती हैं। व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर सूर्योदय से पहले ही सरगी ग्रहण की जाती है, जिसके बाद सूर्योदय के साथ व्रत शुरू हो जाता है। पूरे दिन महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं और शाम को शुभ मुहूर्त में माता करवा की पूजा कर व्रत कथा सुनती हैं। इसके बाद चंद्रमा का दर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया जाता है और व्रत का पारण किया जाता है। व्रत का पारण करने का सही समय और विधि जानना बहुत जरूरी है ताकि पूजा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो सके।
चंद्रमा के उदय का समय और व्रत का पारण
इस वर्ष करवा चौथ के दिन चंद्रमा का उदय रात के लगभग 8 बजकर 13 मिनट पर होने का अनुमान है। इस समय महिलाएं चंद्रमा का दर्शन कर अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण कर सकती हैं। व्रत का पारण करने से पहले चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य है, क्योंकि बिना अर्घ्य के पूजा अधूरी मानी जाती है। सबसे पहले एक लोटे में दूध, अक्षत, चीनी और जल मिलाएं। फिर पूजा की थाली लेकर पहले चांद की आरती करें, उसके बाद छलनी से चंद्रमा का दर्शन करें। इसके बाद लोटे का जल चंद्रमा को अर्पित कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करें।
व्रत का पारण और चंद्रमा को अर्घ्य देने का तरीका
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें, जिसे आपने चांद को देखा था। फिर पति के हाथ से जल ग्रहण करें और कुछ मीठा खाकर व्रत खोलें। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें, जिसमें तामसिक भोजन से बचना चाहिए। ध्यान रहे कि इस दिन तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है। व्रत का पारण सही तरीके से करने से व्रत का फल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है और पति की लंबी उम्र की कामना पूरी होती है।











