काली पूजा 2025 का शुभ समय और विधि
काली पूजा का त्योहार दिवाली की रात मनाया जाता है, जिसमें भक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मां काली की पूजा करते हैं। इस वर्ष काली पूजा का सबसे शुभ समय 20 अक्टूबर की रात 11 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
इस पावन अवसर पर पूजा की विधि बहुत ही सरल और प्रभावशाली है। सबसे पहले स्नान कर उबटन लगाना चाहिए, जो कि पूजा का प्रारंभिक चरण है। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा कर सभी विघ्नों को दूर करने का आशीर्वाद प्राप्त करें। फिर माता का आसन सजाएं, जिसमें लाल या काले कपड़े पर मां काली की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
मां काली की पूजा की विधि और मंत्र
मां काली की पूजा में पंचामृत से उनका अभिषेक करें और उन्हें हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और फूलों से सजाएं। गुड़हल के फूल और काले तिल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दीपक सरसों के तेल का जलाकर मां के चरणों में रखें और वातावरण को सुगंधित करने के लिए धूप और अगरबत्ती जलाएं।
मंत्र जाप भी पूजा का अहम हिस्सा है। आप ‘ॐ क्रीं काली’ या ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ का जप कर सकते हैं। आरती के दौरान कपूर से आरती उतारें और भक्ति का भाव व्यक्त करें। इस दौरान मां को प्रिय पुष्प और तिल अर्पित करें, जिससे पूजा का फल और भी अधिक प्राप्त होता है।
मां काली की पूजा का महत्व और लाभ
मां काली की पूजा का त्योहार न केवल शक्ति और साहस का प्रतीक है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का भी प्रतीक है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां काली की पूजा करता है, उसके जीवन से भय, नकारात्मकता और दुख दूर हो जाते हैं। यह पूजा अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान का प्रतीक है।
मां काली अपने भक्तों को आत्मविश्वास, शक्ति और सुरक्षा प्रदान करती हैं। उन्हें गुड़हल के फूल बहुत प्रिय हैं, जो शक्ति और भक्ति का प्रतीक हैं। घर में पूजा करने के लिए सरसों के तेल का दीप जलाना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
क्या घर में भी मां काली की पूजा की जा सकती है? बिल्कुल, यदि श्रद्धा और सच्चे मन से पूजा की जाए तो इससे घर में शांति, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है। इस त्योहार का उद्देश्य नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है, जो जीवन में नई ऊर्जा और साहस लाता है।











