काली पूजा की तैयारी और आवश्यक सामग्री
काली पूजा मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और असम जैसे राज्यों में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। इस त्योहार का आयोजन कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली के साथ ही किया जाता है, जिसमें माता काली की विशेष पूजा की जाती है। इस पूजा में भाग लेने के लिए आवश्यक सामग्री में माता काली की प्रतिमा या तस्वीर, लाल रंग का कपड़ा (आसन के लिए), पूजा थाली, दीपक, घी, बाती, धूप, अगरबत्ती, कपूर, गंगाजल, अक्षत (चावल), रोली, श्रृंगार का सामान, फूल, फल, कलश, नारियल, आम के पत्ते, बेलपत्र (यदि उपलब्ध हो) और पान के पत्ते शामिल हैं।
काली पूजा का शुभ समय और तिथि
इस वर्ष काली पूजा का आयोजन 21 अक्टूबर 2025 को किया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त रात के 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगा और यह मध्यरात्रि 12 बजकर 44 मिनट तक चलेगा। इस समय के दौरान पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं और माता काली की कृपा मिलती है।
काली पूजा विधि और अनुष्ठान
काली पूजा की शुरुआत सुबह जल्दी स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने से होती है। इसके बाद भगवान गणेश का आवाहन किया जाता है, क्योंकि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही होती है। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता काली की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, फूल, फल और लाल चुनरी अर्पित करें। फिर माता को भोग लगाएं और दीपक जलाकर माता के चरणों के पास रखें। साथ ही धूप और अगरबत्ती जलाएं। अंत में माता काली के मंत्रों का जप करें और आरती कर पूजा समाप्त करें। इस विधि से माता काली की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।











