काली पूजा का महत्व और परंपराएँ
काली पूजा सनातन धर्म का एक विशेष त्योहार है, जो दिवाली के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण मां दुर्गा के काली रूप की पूजा अर्चना करते हैं। रात के समय पूजा के बाद काली माता की आरती का पाठ करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ऐसा करने से माता काली प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इस त्योहार का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है, जो भक्तों में श्रद्धा और भक्ति का संचार करता है।
माता काली की आरती के बोल और अर्थ
माता काली की आरती में उनके विभिन्न स्वरूपों का वर्णन किया गया है। इसमें कहा गया है कि अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। भक्तगण माता के गुणों का गायन करते हैं और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं। आरती के बोल में माता की शक्ति, वीरता और करुणा का बखान किया गया है। भक्तगण मानते हैं कि माता की आरती से उनके क्रोध को शांत किया जा सकता है और वे अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं।
मां काली की आरती का धार्मिक महत्व
मां काली की आरती का पाठ भक्तों के लिए अत्यंत फलदायक माना जाता है। यह न केवल माता की कृपा पाने का माध्यम है, बल्कि मनोवांछित फल प्राप्ति का भी मार्ग है। इस आरती में माता की शक्ति और उनके तेज का वर्णन किया गया है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भक्तगण मानते हैं कि नियमित रूप से काली आरती का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।










