मृत्यु से पहले मिलने वाले संकेत और ज्योतिषीय संकेत
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी व्यक्ति का जीवन समाप्ति के करीब पहुंचता है, तो उसे कई प्रकार के संकेत दिखाई देने लगते हैं। ये संकेत शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर प्रकट होते हैं। उदाहरण के तौर पर, डरावने सपने देखना, लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ना, चिड़चिड़ापन और मानसिक बदलाव जैसी घटनाएं महसूस की जा सकती हैं। गरुड़ पुराण में भी मृत्यु से संबंधित कुछ संकेत बताए गए हैं, जो जीवन के अंतिम समय में प्रकट होते हैं।
माता-पिता की मृत्यु का ज्योतिषीय संकेत और कुंडली विश्लेषण
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शत्रु ग्रह का स्थान पाप ग्रह के साथ हो, व्यय स्थान में चंद्रमा हो या चतुर्थ स्थान में मंगल हो, तो उसकी माता की मृत्यु समय से पहले हो सकती है। इसके अलावा, यदि कुंडली में चंद्रमा अस्तंगत हो, या पाप ग्रह से युक्त या दृष्ट हो, तो माता की मृत्यु का संकेत मिल सकता है। पिता की मृत्यु का संकेत तब मिलता है जब सूर्य से चौथे स्थान में राहु, शनि या मंगल हो, और बृहस्पति या शुक्र की दृष्टि उस पर न हो। कुंडली के बारहवें और छठवें स्थान पर शनि, राहु या केतु का होना माता-पिता की मृत्यु का संकेत है।
मृत्यु से पहले शारीरिक और मानसिक संकेत
मृत्यु से पहले शरीर में कई शारीरिक बदलाव देखने को मिलते हैं। सांसों में बदलाव जैसे धीमी या तेज सांस लेना, कभी-कभी सांस रुक-रुक कर आना सामान्य संकेत हैं। आंखें कांच जैसी चमकदार या चमकदार दिखने लगती हैं। होंठ, जीभ, कान और नाक के हिलने-डुलने पर शरीर के अन्य अंगों में सुनापन या दर्द न होना महसूस होता है। भोजन का स्वाद न मिलना, बोलने में कठिनाई, कानों में आवाज न आना और शरीर का पीला या सफेद पड़ना भी मृत्यु के संकेत हैं। साथ ही, अंगों का सुन्न पड़ना, भोजन का सही स्वाद न मिलना और गंध में बदलाव जैसे लक्षण भी प्रकट हो सकते हैं।










