हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की सतर्कता और तैयारी
हिंद महासागर, जो विश्व व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, अफ्रीका के पूर्वी तट से लेकर मलक्का तक विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है। इस विशाल जल क्षेत्र पर किसी भी देश की ताकत का प्रदर्शन रोकने के लिए भारतीय नौसेना पूरी तरह से सतर्क और तैयार है। वाइस एडमिरल संजय वात्सायन ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में मौजूद अतिरिक्त-क्षेत्रीय शक्तियों (एक्सट्रा रीजनल पावर्स) पर करीबी नजर रख रही है।
उन्होंने बताया कि हर समय हिंद महासागर में लगभग 40 से 50 जहाज सक्रिय रहते हैं, और भारतीय नौसेना किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण इस क्षेत्र में विदेशी शक्तियों की मौजूदगी पहले से अधिक हो गई है, और यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। वाइस एडमिरल वात्सायन ने कहा कि इन जहाजों की संख्या कभी-कभी 50 से अधिक भी हो जाती है।
चीन की गतिविधियों पर भारतीय नौसेना की नजर
भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी कहा कि हम इन विदेशी जहाजों की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। हमें पता है कि वे क्या कर रहे हैं, कब आते हैं और कब जाते हैं। खासतौर पर इस साल सितंबर में चीनी ट्रैकिंग जहाज युआन वांग-5 के हिंद महासागर में सक्रिय होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले भी कई बार चीन के जहाजों की मौजूदगी की खबरें सामने आई हैं।
चीन अपने “अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस” (समुद्र के अंदर की जानकारी) को मजबूत कर रहा है। उसकी नौसेना में 370 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं। ये जहाज समुद्री शोध और जासूसी के काम में लगे रहते हैं, और इन्हें ‘जासूसी पोत’ भी कहा जाता है। ये जहाज समुद्री नेविगेशन और पनडुब्बी अभियानों से संबंधित जानकारी जुटाने में मदद करते हैं।
भारत की समुद्री चुनौतियों और भविष्य की तैयारी
वाइस एडमिरल ने यह भी बताया कि हिंद महासागर में भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें समुद्री डकैती, मानव तस्करी और मादक पदार्थों की तस्करी प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वस्तुओं और तेल के परिवहन का मुख्य मार्ग है, और इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना पूरी तरह से तैयार है।
इस साल भारतीय नौसेना ने 10 नए जहाज और एक पनडुब्बी शामिल की है, और दिसंबर तक चार और जहाज मिलने की उम्मीद है। अगले साल 19 पोत नौसेना में शामिल किए जाने की योजना है, जिनमें से अधिकांश दिसंबर तक कमिशन हो जाएंगे। इसके बाद लगभग 13 और जहाज अगले साल भारतीय नौसेना का हिस्सा बनेंगे।
अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास और सहयोग
वाइस एडमिरल वात्सायन ने बताया कि फरवरी 2026 में होने वाले अंतरराष्ट्रीय बेड़ा निरीक्षण (IFR) में भाग लेने के लिए तैयारी चल रही है। इस बार पहली बार स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियां इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और रूस दोनों ने इस आयोजन में भाग लेने की पुष्टि की है। दोनों देश अपने जहाज भेजेंगे और कुछ विमानों की भागीदारी भी संभव है। इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों ने भाग लेने की इच्छा जताई है, और यह आयोजन 15 से 25 फरवरी 2026 तक विजाग में आयोजित किया जाएगा।











