ग्रह दोष और उनके प्रभाव से वैवाहिक जीवन पर असर
वैवाहिक जीवन का आधार प्रेम, समझदारी और तालमेल होता है, लेकिन कभी-कभी ग्रहों की अशुभ चालें इस सुखमय जीवन में बाधा डाल सकती हैं। ज्योतिष शास्त्र में कुछ दोष ऐसे होते हैं जो पति-पत्नी के बीच मनमुटाव, दूरियों और तनाव का कारण बन सकते हैं। इन दोषों के कारण कई बार तलाक जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। आइए जानते हैं उन मुख्य ग्रह दोषों के बारे में, जो दांपत्य जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
स्वभाव और ग्रहों का अलगाववादी स्वभाव
कुंडली में सूर्य, राहू और शनि ग्रह का स्वभाव अलगाववादी होता है। जब ये ग्रह किसी राशि में स्थित होते हैं, तो उनके स्वामी भी अलगाव की प्रवृत्ति दिखाते हैं, हालांकि उनकी तीव्रता कम होती है। जन्म कुंडली के बारहवें भाव का प्रभाव अलगाव में अहम भूमिका निभाता है। यदि बारहवें भाव का स्वामी राहू या केतु के साथ मिलकर सातवें भाव या सप्तमेश को प्रभावित करता है, तो शादी के बाद अलगाव की स्थिति बन सकती है। इसके अलावा, यदि कुंडली के चौथे भाव का स्वामी छठे भाव में हो या छठे भाव का स्वामी चौथे भाव में हो, तो यह भी तलाक का कारण बन सकता है। शुक्र ग्रह का पीड़ित होना भी इन स्थितियों को और जटिल बना सकता है।
ग्रह दोष और उनके कारण होने वाली समस्याएँ
कुज दोष, जिसे मंगल दोष भी कहा जाता है, वैवाहिक जीवन में विवाद, गलतफहमी और तलाक का कारण बन सकता है। यह दोष जातक के जीवन में परेशानियों को जन्म देता है। नाड़ी दोष, जो कुंडली मिलान में बनता है, वैवाहिक संबंधों, स्वास्थ्य और वित्तीय समस्याओं को जन्म दे सकता है।
विष दोष शनि और चंद्रमा की युति के कारण बनता है, और माना जाता है कि यह दोष जीवन साथी के साथ समस्याएँ खड़ी कर सकता है। दरिद्र योग तब बनता है जब ग्रहों की युति आर्थिक अस्थिरता और गरीबी का संकेत देती है, जो वैवाहिक जीवन में कठिनाइयाँ ला सकता है।
पापकर्तरी योग में सप्तमेश का चंद्रमा के साथ दोषपूर्ण स्थिति में होना प्यार की कमी, संचार में बाधाएँ और अनुकूलता की कमी पैदा कर सकता है। यदि शुक्र ग्रह अपनी ही राशि में कुछ विशेष डिग्रियों पर हो, तो यह भी रिश्तों का अंत कर सकता है।











