गोवर्धन पूजा का महत्व और तिथि
गोवर्धन पूजा का त्योहार भगवान कृष्ण की कथा से जुड़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाकर गांववासियों और उनकी गायों की रक्षा की थी। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है, जो इस वर्ष 21 अक्टूबर को शाम 5:54 बजे से शुरू होकर 22 अक्टूबर की रात 8:16 बजे तक चलता है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन होकर उनके द्वारा प्रदत्त संरक्षण और शक्ति का स्मरण करते हैं।
धार्मिक महत्व और परंपराएँ
गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार भगवान कृष्ण द्वारा इंद्रदेव के अहंकार को परास्त करने की कथा को याद करने का अवसर है। इस दिन भक्त अन्नकूट यानी विविध प्रकार के अनाज, व्यंजन और मिठाइयों से सजाए गए गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं। यह पर्व न केवल भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति और कृषि के महत्व को भी दर्शाता है।
कैसे मनाई जाती है गोवर्धन पूजा?
इस त्योहार पर भक्त गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर अन्नकूट सजाते हैं, भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और विभिन्न प्रकार के भोजन अर्पित करते हैं। घरों में विशेष रूप से भगवान कृष्ण की पूजा करने और अन्न, भोजन या आवश्यक वस्तुओं का दान करने का प्रचलन है। अन्नकूट का अर्थ है “अनाज का पर्वत”, जिसमें भक्त विभिन्न अनाज, व्यंजन और मिठाइयों को भगवान के लिए समर्पित करते हैं। यह त्योहार भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की कृपा और संरक्षण के लिए मनाया जाता है।











