गोवर्धन पूजा के बाद गोबर के पर्वत का सही उपयोग
गोवर्धन पूजा के पश्चात यदि आप गोबर से बने पर्वत को तोड़ने का विचार कर रहे हैं, तो यह शुभ माना जाता है कि इसे छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर घर के मिट्टी वाले स्थान पर लीप दें। यह परंपरा घर को पवित्र और शुद्ध बनाने के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोग इस गोबर से अपने पूरे घर की सफाई करते हैं, जिससे घर का वातावरण सकारात्मक और धार्मिक ऊर्जा से भर जाता है।
गोबर से बने कंडों का उपयोग और धार्मिक महत्व
इसके अतिरिक्त, आप इस गोबर से ‘गोइठा’ (जिसे कई क्षेत्रों में कंडा या उपला भी कहा जाता है) बना सकती हैं। इन गोइठों का उपयोग पूजा, हवन या जलावन के कार्यों में किया जा सकता है। यह परंपरा धार्मिक दृष्टिकोण से शुभ मानी जाती है और घर में सुख-समृद्धि लाने में सहायक होती है।
गोबर का अनुचित उपयोग और उससे बचाव
ध्यान रखें कि पूजा में उपयोग किए गए गोबर को कभी भी अनावश्यक स्थान पर न फेंकें या अस्वच्छ जगह पर न डालें। साथ ही, इस गोबर से बने कंडों का प्रयोग तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, प्याज या लहसुन पकाने में न करें, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। यदि आपके पास गोबर से लीपने का स्थान नहीं है, तो इसे किसी ऐसे व्यक्ति को सौंप दें जो इसका उचित उपयोग कर सके। आप चाहें तो इस गोबर को किसी पवित्र स्थान जैसे तुलसी का चौरा या पेड़ के पास भी लगा सकते हैं।










