गोपाष्टमी का महत्व और इतिहास
गोपाष्टमी का त्योहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जो भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। यह पर्व उस ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है जब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों की रक्षा की थी। इस दिन गौमाता की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय संयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक मास की अष्टमी तिथि पर दो शुभ योग बन रहे हैं। रवि योग का शुभारंभ 30 अक्टूबर सुबह 6 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर 31 अक्टूबर सुबह 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस योग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और स्वास्थ्य में सुधार होता है। रवि योग को अत्यंत शुभ माना गया है, जो इस पर्व को और भी फलदायी बनाता है।
गोपाष्टमी की पौराणिक कथा और परंपरा
मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण छह वर्ष के थे, तब उन्होंने माता यशोदा से गाय चराने की अनुमति मांगी। माता ने नंद बाबा से पूछने को कहा, जिन्होंने पहले कहा कि कृष्ण अभी छोटे हैं, इसलिए केवल बछड़ों को चराने दें। पर कृष्ण की जिद के बाद नंद बाबा ने ऋषि शांडिल्य से शुभ मुहूर्त पूछा, जिन्होंने उस दिन को गोचारण के लिए सबसे उपयुक्त बताया। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने पहली बार गायें चराई थीं, और तभी से यह दिन गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा।











