देव उठनी एकादशी पूजा सामग्री और विधि
देव उठनी एकादशी के दिन भक्तों को सच्चे मन से पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है। यदि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा की जाए, तो भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इस शुभ अवसर पर पूजा के लिए आवश्यक सामग्री में भगवान विष्णु की प्रतिमा या शालिग्राम, पूजा के लिए चौकी या आसन, तुलसी का पौधा जो इस दिन अनिवार्य माना गया है, पीले रंग का वस्त्र जो भगवान विष्णु को प्रिय है, पुष्प जैसे गुलाब, अगस्त्य, कनैल और कदम्ब के फूल, धूप, दीपक, हल्दी, चावल, रोली, चंदन जैसी पूजा सामग्री, भोग के लिए मिठाई या प्रसाद, सुहाग का सामान जैसे लाल चुनरी, चूड़ियाँ या साड़ी, शंख और घंटी शामिल हैं। इन सभी वस्तुओं का श्रद्धा और विधि-विधान से प्रयोग करने से पूजा सफल होती है।
देव उठनी एकादशी 2025 की तिथियां और शुभ समय
इस वर्ष देव उठनी एकादशी का पर्व 1 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा, जबकि वैष्णव समुदाय के लोग 2 नवंबर 2025 को व्रत रखेंगे। यह तिथि और समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का महत्व अत्यधिक है। व्रत और पूजा का सही समय जानना भी आवश्यक है ताकि भक्तगण अपने धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण श्रद्धा के साथ संपन्न कर सकें।
भोग में क्या चढ़ाएं और पूजा के लाभ
देव उठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विशेष भोग चढ़ाए जाते हैं। इन प्रसादों में खीर या सेवई, तुलसी की पत्ती युक्त प्रसाद, पान-सुपारी, मौसमी फल, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और शक्कर का मिश्रण), पेड़ा या मोदक जैसी सात्त्विक मिठाइयां शामिल हैं। इस पूजा के लाभ अनेक हैं, जिनमें विवाह में आ रही बाधाओं का दूर होना, पैतृक दोष और ग्रह बाधाओं का कम होना, धन और भाग्य में वृद्धि, घर में सुख-शांति का वास, संतान प्राप्ति का आशीर्वाद और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार प्रमुख हैं। इन शुभ फलों से जीवन में खुशहाली और समृद्धि का संचार होता है।











