चित्रगुप्त पूजा का महत्व और परंपराएँ
चित्रगुप्त पूजा का त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आत्मनिरीक्षण और कर्म के महत्व को समझने का अवसर भी प्रदान करता है। मान्यता है कि यदि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से भगवान चित्रगुप्त की कथा का पाठ या श्रवण किया जाए, तो जीवन के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है। इसीलिए कहा जाता है कि इस दिन इस कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह हमें सिखाती है कि हर कर्म का हिसाब होता है और सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।
प्राचीन कथा और धार्मिक महत्व
प्राचीन काल में एक राजा था जिसका नाम सौदास था, जो अपने अत्याचारी और निर्दयी व्यवहार के लिए जाना जाता था। उसकी प्रजा उसके अत्याचारों से दुखी थी। एक दिन जब वह नगर भ्रमण कर रहा था, तो उसने एक ब्राह्मण को पूजा करते देखा। जिज्ञासा से उसने पूछा, “हे ब्राह्मण, आप किस देवता की पूजा कर रहे हैं?” ब्राह्मण ने उत्तर दिया, “राजन, आज कार्तिक शुक्ल द्वितीया का दिन है, इसलिए मैं यमराज के लेखपाल भगवान चित्रगुप्त की पूजा कर रहा हूँ। इस पूजा से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।” इस बात को सुनकर राजा सौदास ने भी श्रद्धा से चित्रगुप्त की पूजा की। कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हुई, और उसे यमलोक ले जाया गया। वहां चित्रगुप्त ने यमराज को बताया कि राजा ने जीवन में अनेक पाप किए, परंतु उसकी श्रद्धा और सच्चे मन से पूजा करने के कारण उसे नरक नहीं भेजा गया। अंततः उसे स्वर्ग प्राप्त हुआ। यह कथा हमें सिखाती है कि श्रद्धा और सच्चाई से की गई पूजा का फल अवश्य मिलता है।
पढ़ाई-लिखाई और पूजा का संबंध
चित्रगुप्त पूजा के दिन लोग अपनी किताबें, पेन, कॉपियां और हिसाब-किताब की बही पूजा के लिए रखते हैं। विद्यार्थी और व्यापारी दोनों ही इस दिन विशेष रूप से कलम-दवात की पूजा करते हैं, ताकि उन्हें ज्ञान, सफलता और समृद्धि प्राप्त हो सके। परंपरा के अनुसार, इस दिन पढ़ाई या लिखने का कार्य नहीं किया जाता है। माना जाता है कि जब ये वस्तुएं पूजा में रखी जाती हैं, तो वे विश्राम की अवस्था में होती हैं। इसलिए, उस दिन इनका उपयोग न करना शुभ माना जाता है। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि पूजा के दौरान इन वस्तुओं को विश्राम देना आवश्यक है, ताकि वे शुभ फल प्रदान कर सकें।
चित्रगुप्त जी का परिचय और पूजा का उद्देश्य
चित्रगुप्त जी यमराज के लेखपाल हैं, जो प्रत्येक जीव के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। इन्हें धर्म और न्याय का देवता भी कहा जाता है। इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने का मुख्य उद्देश्य है, कि व्यक्ति के पाप धुल जाएं और मोक्ष की प्राप्ति हो। साथ ही, यह पूजा जीवन में सद्बुद्धि, ज्ञान और शुभ फल लाने का माध्यम बनती है। कथा का पाठ करने का महत्व भी इसी में है, क्योंकि इससे व्यक्ति अपने कर्मों का बोध करता है और भगवान की कृपा से जीवन में सुख, शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। यह पर्व मुख्य रूप से कायस्थ समाज द्वारा मनाया जाता है, लेकिन अब यह हर वर्ग में श्रद्धा से मनाया जाने लगा है।









