अहोई अष्टमी का महत्व और परंपराएँ
अहोई अष्टमी का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने पुत्र की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वर्तमान समय में यह व्रत केवल पुत्र के लिए ही नहीं, बल्कि बेटियों की खुशहाली और स्वास्थ्य के लिए भी किया जाने लगा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से संतान की आयु लंबी होती है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और बीमारियों से राहत मिलती है। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में विशेष रूप से मनाया जाता है।
अहोई अष्टमी व्रत के दौरान क्या नहीं करना चाहिए
अहोई अष्टमी के दिन व्रती महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें उन्हें बिना जल और भोजन के रहना चाहिए। यदि व्रत के दौरान कोई भी प्रकार का भोजन या जल ग्रहण किया जाए, तो व्रत टूट जाता है। इस दिन महिलाओं को नुकीली या धारदार वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत का प्रभाव कम हो सकता है। साथ ही, मिट्टी से संबंधित कार्य भी वर्जित माना गया है। व्रत के दौरान सोना नहीं चाहिए और भगवान का ध्यान, मंत्र जप करना आवश्यक है। व्रत का संकल्प लेने के बाद उसे बीच में नहीं तोड़ना चाहिए। महिलाओं को इस दिन झगड़ा करने या अपशब्द बोलने से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह व्रत के नियमों के खिलाफ है। झूठ बोलना भी वर्जित है और व्रत के दौरान बिस्तर पर लेटना या बैठना उचित नहीं माना जाता है।
2025 में अहोई अष्टमी कब होगी
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025 में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर को दोपहर 12:24 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 14 अक्टूबर को सुबह 11:09 बजे होगा। इस प्रकार, इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह व्रत महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, जो उनके जीवन में सुख, समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना को पूरा करता है।










