ओडिशा में युवा पहलवानों की यात्रा पर सवाल
ओडिशा सरकार एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है, जब 18 युवा कुश्ती खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्कूल कुश्ती चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए ट्रेन के सामान्य डिब्बे में टॉयलेट के पास बैठकर यात्रा करनी पड़ी। इस अमानवीय स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे देश में गहरी नाराजगी फैल गई है।
यह सभी खिलाड़ी ओडिशा से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जा रहे थे। इनमें दस लड़के और आठ लड़कियां शामिल थीं। आरोप है कि यात्रा के दौरान इन खिलाड़ियों के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं थी और न ही आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा गया। कड़ाके की ठंड में इन बच्चों को असुरक्षित और गंदे माहौल में यात्रा करनी पड़ी, जो खेल भावना और मानवाधिकार का उल्लंघन है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और विपक्षी दलों का आरोप
घटना के सामने आने के बाद ओडिशा के स्कूल और जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पूर्व ओलंपियन निशानेबाज जॉयदीप कर्माकर ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सुझाव दिया कि रेलवे और हवाई सेवाओं में खिलाड़ियों के लिए विशेष कोटा होना चाहिए, जैसे सशस्त्र बलों के लिए होता है।
विपक्षी दलों ने भी इस घटना को लेकर सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता नवज्योति पटनायक ने इसे राष्ट्रीय शर्म बताया, जबकि बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने इसे ओडिशा की अस्मिता के खिलाफ बताया और सरकार की नाकामी का प्रतीक माना। सूत्रों के अनुसार, खेल विभाग ने इस मामले की जिम्मेदारी स्कूल और जनशिक्षा विभाग पर डाल दी है, जिससे राज्य के खेल विकास की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकार की जांच और भविष्य की दिशा
इस घटना ने ओडिशा के खेल क्षेत्र में मौजूद खामियों को उजागर कर दिया है, और सरकार से जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं। यह घटना खेलों में सरकारी व्यवस्था की कमियों को दर्शाती है और खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा के लिए नई नीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।











