दिल्ली-एनसीआर में अचानक घना कोहरा क्यों छाया?
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अचानक घना कोहरा छा जाने से दृश्यता काफी कम हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोहरा पश्चिमी हवाओं के साथ आई धूल और नमी के मिश्रण का परिणाम है। इस मौसम में अचानक कोहरे का बनना आम बात नहीं है, बल्कि यह मौसम की बदलती परिस्थितियों का संकेत भी हो सकता है। वर्तमान में, वायु प्रदूषण और मौसम के बदलाव मिलकर कोहरे की स्थिति को और भी गंभीर बना रहे हैं।
मौसम विज्ञान और कोहरे का कारण
उत्तर भारत में कोहरे का मुख्य कारण
उत्तर प्रदेश सहित उत्तरी भारत में लंबे समय से चल रही ठंडी लहरें, अधिक नमी और हवा के अचानक पलटाव का प्रभाव कोहरे के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ठंडी उत्तर दिशा से आने वाली हवाओं, कम गति वाली हवा और सतह के तापमान में गिरावट के कारण घना कोहरा बन रहा है। इन कारणों से नमी जमीन के पास फंस जाती है, जिससे दृश्यता प्रभावित होती है।
प्रदूषण का प्रभाव और मौसम का बदलाव
इसके अलावा, वायु प्रदूषण भी कोहरे को घना बनाने में अहम भूमिका निभाता है। वाहनों, उद्योगों और कृषि अवशेष जलाने से निकलने वाले एयरोसोल वातावरण में जमा होकर कोहरे की स्थिति को और भी गंभीर बना देते हैं। इस तरह के प्रदूषित कण नमी के साथ मिलकर कोहरे को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। वर्तमान में तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे गर्मी का आगमन पहले हो रहा है और मौसम के पारंपरिक पैटर्न में बदलाव देखा जा रहा है।
क्या कहते हैं मौसम विशेषज्ञ?
पश्चिमी हवाओं और धूल का संबंध
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर में इस तरह के कोहरे का मुख्य कारण तेज़ पश्चिमी हवाओं के साथ आई धूल है। स्कायमेट वेदर (Skymet Weather) के वाइस प्रेसिडेंट महेश पलावत के अनुसार, पाकिस्तान के बलूचिस्तान और थार रेगिस्तान से आ रही तेज़ हवाओं के कारण बड़ी मात्रा में धूल के कण दिल्ली-एनसीआर में पहुंच रहे हैं। ये सूखे और तेज़ हवाओं वाले इलाकों से उठी धूल सैकड़ों किलोमीटर दूर तक फैल जाती है। मौजूदा मौसम के पैटर्न ने इन धूल भरी हवाओं को उत्तर-पश्चिम भारत की ओर मोड़ दिया है।
धूल और स्मॉग का मिथक
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिल्ली की स्मॉग का ईरान (Iran) जंग से कोई संबंध नहीं है। पलावत ने स्पष्ट किया कि ईरान में रिफाइनरी स्ट्राइक से निकले धुएं इतनी लंबी दूरी तय नहीं कर सकते और न ही वे सीधे दिल्ली में धुंध का कारण बन सकते हैं। मौजूदा हवा की दिशा और वातावरण की स्थिति इस तरह की संभावना का समर्थन नहीं करती। इसलिए, यह मानना गलत है कि दिल्ली की स्मॉग का संबंध ईरान की घटनाओं से है।








