महाराष्ट्र में नई नियमावली से ओला, उबर और ई-रिक्शा में बदलाव
महाराष्ट्र सरकार ने ऐप-आधारित टैक्सी और ई-रिक्शा सेवाओं के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य यात्रियों और ड्राइवरों दोनों की सुरक्षा और सुविधा को बेहतर बनाना है। इन नियमों में किराए पर नियंत्रण, सुरक्षा मानकों, और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह कदम राज्य में राइड शेयरिंग सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
सर्ज प्राइसिंग और किराए पर नई सीमा लागू
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, सर्ज प्राइसिंग यानी अत्यधिक किराया वसूली पर रोक लगाई गई है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) द्वारा निर्धारित मूल किराए का 1.5 गुना से अधिक किराया नहीं लिया जा सकता है। साथ ही, कम मांग के समय किराए में 25 प्रतिशत से अधिक की कटौती भी प्रतिबंधित है। वर्तमान में, बिना नियमों के किराए में बढ़ोतरी का कोई नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब यात्रियों से वसूले जाने वाले सुविधा शुल्क को मूल किराए का 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होने का प्रावधान है, और कुल कटौती 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
ड्राइवरों के काम के घंटे और प्रशिक्षण मानक
नए नियमों के तहत, ड्राइवर हर दिन अधिकतम 12 घंटे ही ऐप पर लॉग इन रह सकते हैं। इसके बाद उन्हें कम से कम 10 घंटे का आराम देना अनिवार्य होगा। साथ ही, ड्राइवरों को ऑनबोर्डिंग से पहले 30 घंटे का ओरिएंटेशन और मोटिवेशनल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। जिन ड्राइवरों की रेटिंग दो स्टार या उससे कम है, उन्हें सुधारात्मक प्रशिक्षण लेना जरूरी होगा और जब तक वे ऐसा नहीं करते, तब तक उन्हें प्लेटफॉर्म से निलंबित रखा जाएगा।
यात्रियों की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता पर जोर
यात्रियों को अक्सर राइड रद्द होने की समस्या का सामना करना पड़ता है, खासकर जब ड्राइवर गंतव्य जानने के बाद यात्रा से इनकार कर देते हैं। नए नियमों के अनुसार, ड्राइवर को राइड स्वीकार करने से पहले यात्री का गंतव्य नहीं दिखना चाहिए। साथ ही, ऐप्स को लाइव लोकेशन शेयरिंग और ट्रिप स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा देनी होगी। यात्रियों की सुरक्षा के लिए, इन ऐप्स को ₹5 लाख तक का यात्रा बीमा कवरेज भी प्रदान करना अनिवार्य किया गया है।
लाइसेंस, शुल्क और वाहन मानक
राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) या RTA से नए लाइसेंस प्राप्त करने के लिए, एग्रीगेटर्स को क्रमशः ₹10 लाख और ₹2 लाख का शुल्क देना होगा। लाइसेंस का नवीनीकरण करने के लिए उन्हें ₹25,000 या ₹5,000 का भुगतान करना पड़ेगा। इसके अलावा, वाहनों की संख्या के आधार पर सुरक्षा जमा भी जरूरी होगी: 1000 वाहनों तक के लिए ₹10 लाख, 10,000 तक के लिए ₹25 लाख, और उससे अधिक के लिए ₹50 लाख।
वाहनों की उम्र और भाषा आवश्यकताएं
ऑटो और टैक्सी के लिए, नौ साल से कम पुराना वाहन ही संचालन के योग्य माना जाएगा, जबकि बसों के लिए यह सीमा आठ साल है। साथ ही, ऐप्स मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि सेवा का व्यापक स्तर पर लाभ मिल सके। परिवहन मंत्री ने कहा है कि इन नियमों का उद्देश्य ड्राइवरों के शोषण को रोकना और सेवा की गुणवत्ता को बढ़ावा देना है।











