महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता सूची की खामियां
महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच मतदाता सूची की सटीकता को लेकर विवाद गहरा हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि वोटर लिस्ट में कई गलतियां और डुप्लीकेट नाम शामिल हैं, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इस संदर्भ में सत्तारूढ़ शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ ने भी चुनाव आयोग से अपील की है कि चुनाव को कम से कम दस दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाए ताकि मतदाता सूची में मौजूद खामियों को दूर किया जा सके।
डुप्लीकेट नामों की समस्या और चुनाव टालने का सुझाव
संजय गायकवाड़ ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने अभी तक मतदाता सूची से डुप्लीकेट नामों को हटाने का कार्य पूरा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव सिर्फ दस दिन आगे बढ़ाए जाएं, तो इन गलतियों को आसानी से सुधारा जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि बुलढाणा जिले में ही छह महीने की जांच में करीब आठ हजार डुप्लीकेट नाम पाए गए हैं। गायकवाड़ ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग पूरे राज्य में लाखों मतदाताओं से लिखित गारंटी लेगा ताकि मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सुझाव दिया कि आयोग को इन नामों पर सीधे ‘Deleted’ का निशान लगाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
विपक्ष का आरोप और चुनाव स्थगित करने की मांग
विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) जिसमें शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट), एनसीपी (शरद पवार गुट) और कांग्रेस शामिल हैं, ने मंगलवार को कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में मौजूद गलतियों को सुधारने से पहले ही चुनाव कराने की जल्दबाजी कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि आयोग ने मतदाता सूची में कई बार गलत तरीके से एक ही व्यक्ति के नाम जोड़ने या हटाने का काम किया है। विपक्षी दलों का मानना है कि जब तक इन खामियों को ठीक नहीं किया जाता, तब तक स्थानीय निकाय चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए।











