महाराष्ट्र सरकार की राहत योजना पर विवाद और जमीनी हकीकत
महाराष्ट्र की कैबिनेट बैठक में मंगलवार को किसानों के लिए घोषित राहत पैकेज को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा घोषित सहायता राशि अभी तक किसानों तक नहीं पहुंची है। इस पर अधिकारियों ने जवाब दिया कि सहायता राशि पहले ही किसानों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई है।
मंत्री ने कहा कि कलेक्टर दावा कर रहे हैं कि किसानों को पैसा मिल चुका है, लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई रकम नहीं मिली है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने तुरंत एक समीक्षा बैठक बुलाने का आदेश दिया और कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कितनी राशि किसानों तक पहुंची है, इसकी पूरी जानकारी प्रस्तुत की जाए।
कृषि राहत में देरी का कारण और सरकार की प्रतिक्रिया
बैठक में यह खुलासा हुआ कि अब तक लगभग 50 लाख किसानों को राहत राशि जारी की गई है, जबकि करीब एक करोड़ किसान अभी भी इस सहायता से वंचित हैं। अधिकारियों ने बताया कि दिवाली की छुट्टियों के कारण किसानों के खातों में पैसा ट्रांसफर करने में देरी हुई है।
शिवसेना के मंत्रियों ने इस मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया कि जब पंचनामा और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो फिर किसानों के खातों में पैसा क्यों नहीं पहुंच रहा है। यह भी पता चला कि संभाजीनगर जिले में अभी तक एक भी रुपये की राहत राशि नहीं दी गई है। बैठक में यह भी बताया गया कि सरकार को करीब 1200 करोड़ रुपये की सहायता की आवश्यकता है, जिसे आज शाम तक जारी किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राहत वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर हाल में किसानों तक मदद पहुंचनी चाहिए।
सरकार की योजना और किसानों की उम्मीदें
महाराष्ट्र सरकार ने राहत पैकेज के तहत किसानों को वित्तीय सहायता देने का लक्ष्य रखा है, लेकिन वितरण में हो रही देरी से किसान निराश हैं। सरकार का मानना है कि जल्द ही सभी पात्र किसानों को सहायता राशि मिल जाएगी। इस मुद्दे पर सरकार की निगरानी तेज कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की लापरवाही न हो और किसानों को समय पर मदद मिल सके।











