महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का भूमि विवाद पर स्पष्ट जवाब
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत द्वारा लगाए गए पार्टी कार्यालय के लिए अवैध भूमि अधिग्रहण के आरोपों का सटीक और मजबूत जवाब दिया है। भूमि पूजन से पहले इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने कहा, “मुझे पहले से ही ज्ञात था कि भूमि पूजन के दिन कुछ नेता इस तरह के आरोप लगाएंगे। इसलिए हमने पहले ही निर्णय लिया था कि पार्टी का कार्यालय भूमि पूरी तरह से नियमों और बीएमसी (BMC) की मंजूरी के साथ खरीदा जाएगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए लिया गया था और यह भवन किसी व्यावसायिक या व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं, बल्कि आम जनता को न्याय दिलाने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है।
आरोपों का करारा जवाब और पार्टी की पारदर्शिता
फडणवीस ने आरोप लगाने वालों को करारा जवाब देते हुए कहा, “जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग खुद जमीन हड़पने और पैसे की हेराफेरी में लिप्त हैं, उन्हें हम पर जमीन हड़पने का आरोप नहीं लगाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी के सभी नेताओं से इस कार्यालय निर्माण के लिए दान की अपील की गई है, ताकि यह कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा हो सके।
संजय राउत के आरोप और भूमि विवाद का संदर्भ
इससे पहले, संजय राउत ने मुंबई के मरीन लाइन्स इलाके में भाजपा के नए कार्यालय के लिए जमीन के प्लॉट को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में दावा किया था कि यह जमीन मूल रूप से एक परिवार की थी, जिसने बिना अनुमति के इस प्लॉट का एक हिस्सा कई बैंकों के पास गिरवी रखा था।
राउत ने आरोप लगाया कि यह 1377.79 वर्ग मीटर की जमीन 99 साल की लीज पर दी गई थी, जिसकी अवधि 2001 में समाप्त हो चुकी है। उन्होंने इस प्रक्रिया की तेज गति और पारदर्शिता पर सवाल उठाए, और कहा कि इस जमीन का हस्तांतरण नियमों को तोड़कर तेजी से किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया है, जिससे यह साबित होता है कि यह जमीन नियमों को ‘तेज गति से मोड़कर’ हासिल की गई।











