मध्य प्रदेश के रायसेन में गेहूं की बड़ी लापरवाही का खुलासा
रायसेन (Madhya Pradesh) के ओबेदुल्लागंज स्थित वेयर हाउस में हजारों टन गेहूं के खराब होने का मामला सामने आया है, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। इस गेहूं की कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये बताई जा रही है, लेकिन यह अब उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। इस मामले ने सरकारी व्यवस्था और भंडारण की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
लंबे समय से खराब गेहूं का संग्रह और उसकी स्थिति
यह गेहूं लंबे समय से वेयर हाउस में रखा गया था, जहां करीब 22 हजार टन गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए बार-बार कीटनाशक का छिड़काव किया गया। बावजूद इसके, यह अनाज अब दुर्गंधयुक्त और नष्ट हो चुका है, जो पशु चारे के लिए भी अनुपयोगी हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का भंडारण न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय है।
प्रशासनिक जांच और जिम्मेदारी का सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इतने बड़े स्टॉक को वर्षों तक वेयर हाउस में क्यों रखा गया और इसकी समय पर निकासी क्यों नहीं की गई। जानकारी के अनुसार, यह गेहूं मूल रूप से सीहोर (Sehore) जिले के बख्तरा (Bakhtara) से 2022 में यहां शिफ्ट किया गया था, जबकि इससे पहले भी इसकी खराब होने की आशंका जताई जा चुकी थी।
कृषि और भंडारण विभाग के अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं। तहसीलदार ने कहा है कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सवाल यह भी है कि यदि गेहूं पहले से ही खराब था, तो उसे बार-बार क्यों स्थानांतरित किया गया और लंबे समय तक क्यों रखा गया? फिलहाल, प्रशासन खराब गेहूं की नीलामी या नष्ट करने का निर्णय लेने की प्रक्रिया में है।











