मध्य प्रदेश में जल प्रदूषण का गंभीर संकट
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने मध्य प्रदेश के शहरों में सीवेज मिश्रित पानी की आपूर्ति को नागरिकों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन माना है। ग्रीन एक्टिविस्ट कमल कुमार राठी की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस शिव कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने पूरे प्रदेश के नगर निगमों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कठोर चेतावनी दी है।
सख्त कदम और जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए, बेंच ने जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति छह हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। आगामी सुनवाई 30 मार्च को निर्धारित की गई है।
सुनवाई में वरिष्ठ वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया कि समिति में IIT इंदौर के निदेशक का नामित विशेषज्ञ, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) भोपाल के प्रतिनिधि, राज्य के पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव, शहरी प्रशासन और विकास विभाग के सचिव, जल संसाधन विभाग के प्रतिनिधि और MP pollution control board (MPPCB) के प्रतिनिधि शामिल हैं।
आदेश का प्रभाव और आवश्यक सुधार
NGT ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश की एक प्रति मध्य प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों और नगर आयुक्तों को भेजी जाएगी ताकि तुरंत प्रभाव से इन निर्देशों का पालन किया जा सके। बेंच ने इंदौर शहर में नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए पीने के पानी में प्रदूषण के कारण उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संकट पर भी प्रकाश डाला है।
दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र के निवासी गंभीर रूप से प्रदूषित पानी के संपर्क में आए, जिससे बड़े पैमाने पर बीमारियों का प्रकोप हुआ। इस घटना में कई लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए, कुछ को इंटेंसिव केयर की आवश्यकता पड़ी और कई की मौत भी हुई, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं।
कोर्ट ने पूरे राज्य में स्वच्छ और सुरक्षित पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश दिए हैं। इनमें पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट, सप्लाई का समय, शिकायत निवारण के लिए मजबूत मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (MIS) और मोबाइल ऐप का विकास शामिल है।
सभी शहरों में GIS आधारित मैपिंग कराई जानी चाहिए ताकि उन स्थानों की पहचान हो सके जहां सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल रहा है। साथ ही, पानी को साफ करने के लिए प्री-क्लोरीनेशन, पोस्ट-क्लोरीनेशन और एरेशन जैसी प्रक्रियाओं को अनिवार्य किया गया है। ओवरहेड टैंकों और जल स्रोतों को नियमित रूप से साफ और क्लोरीनेट किया जाना चाहिए।
पाइपलाइनों में लीकेज और ट्रांसमिशन नुकसान को रोकने के लिए तत्काल मरम्मत की जानी चाहिए। जल स्रोतों के आसपास के अतिक्रमण भी तुरंत हटाए जाने चाहिए। मार्च और जुलाई के बीच पानी की कमी को देखते हुए निर्माण कार्यों को स्थगित कर दिया जाना चाहिए और वार्ड-वार राशनिंग लागू करनी चाहिए।
सार्वजनिक कुओं और बावड़ियों को पुनर्जीवित करने के लिए योजनाएं बनानी चाहिए। सरकारी और निजी भवनों में बारिश का पानी संग्रहित करने को अनिवार्य किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नागरिकों को पानी के उपयोग के संबंध में दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।
शहर की सीमा के भीतर दो से अधिक जानवरों वाली सभी डेयरियों को चार महीने के भीतर शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। साथ ही, पीने के पानी में मूर्तियों का विसर्जन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
अंत में, सभी घरेलू और व्यावसायिक पानी कनेक्शनों पर मीटर लगाना अनिवार्य किया गया है। पानी की आपूर्ति संकट के समय टैंकरों से पानी सप्लाई के लिए पूर्व निर्धारित शर्तों के साथ योजना बनानी चाहिए।









