मध्य प्रदेश में राष्ट्रगान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज
मध्य प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में हाल ही में एक विवाद ने तूल पकड़ लिया है, जब इंदौर में कांग्रेस की एक महिला पार्षद ने इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार कर दिया। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में गर्माहट ला दी है और दोनों प्रमुख दलों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई है।
मुख्यमंत्री का कड़ा रुख और विपक्ष की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि प्रदेश कांग्रेस के नेता इस पार्षद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकते, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी का असली चरित्र इस घटना में उजागर हो रहा है। दूसरी ओर, विपक्षी पार्टी ने कहा कि उन्हें भाजपा (BJP) से देशभक्ति का प्रमाणपत्र लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर
यादव ने कहा कि कांग्रेस की महिला पार्षदों ने राष्ट्रगान का अपमान किया है और इस घटना से पार्टी का असली चेहरा सामने आया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता अक्सर भगवान राम का अपमान करते हैं और हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। यादव ने यह भी कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद खड़ा किया था, और आजादी के बाद सरकार ने इसके पांच छंद हटा दिए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वंदे मातरम’ के छह छंद गाने का आदेश देकर देशभक्ति का संदेश दिया है।
विपक्षी नेता जीतू पटवारी ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस मामले को सांप्रदायिक रंग दे रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान और संविधान कांग्रेस की आत्मा हैं और हर नागरिक को इसका सम्मान करना चाहिए। पटवारी ने यह भी कहा कि दोनों महिला पार्षदों का ‘वंदे मातरम’ से इनकार करना गलत है और इस मामले को पार्टी की अनुशासन समिति के पास भेज दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने जानबूझकर इस विवाद को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की है ताकि प्रदेश में चल रहे भ्रष्टाचार, पानी की समस्या और अन्य बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को कांग्रेस को देशभक्ति का सर्टिफिकेट नहीं देना चाहिए।









